संत गुरु रविदास जी ने 'बेगमपुरा' (Begampura) के माध्यम से एक ऐसे आदर्श नगर या समाज की परिकल्पना की थी जहाँ 'गम' अर्थात दुःख का कोई स्थान न हो। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ मानवीय गरिमा (Human Dignity) सर्वोपरि है और किसी भी व्यक्ति को उसकी जाति, धर्म या जन्म के आधार पर छोटा नहीं समझा जाता। बेगमपुरा का अर्थ ही एक ऐसा शहर है जो भय, चिंता और शोषण से पूरी तरह मुक्त (Free from Exploitation) हो। यहाँ हर नागरिक को बराबरी का हक मिलता है।
इस नगरी में सामाजिक न्याय (Social Justice) और आर्थिक समानता (Economic Equality) का बोलबाला है। गुरु जी ने स्पष्ट किया कि बेगमपुरा में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता और न ही किसी पर जबरन कर (Tax) थोपा जाता है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ अमीरी और गरीबी की खाई नहीं है, बल्कि सभी लोग अपनी मेहनत और ईमानदारी (Honesty) से जीवन व्यतीत करते हैं। यहाँ का प्रशासन पूरी तरह से लोक-कल्याणकारी (Welfare Oriented) और पारदर्शी होता है।
धार्मिक कट्टरता से दूर बेगमपुरा में वैचारिक स्वतंत्रता (Freedom of Thought) का वास है। यहाँ लोग अपने ईश्वर की भक्ति अपनी इच्छानुसार कर सकते हैं और आपसी भाईचारे (Brotherhood) का पालन करते हैं। गुरु रविदास जी की यह नगरी वास्तव में आधुनिक लोकतंत्र (Modern Democracy) और समाजवाद का सबसे प्रारंभिक और शुद्ध स्वरूप है। यहाँ ऊंच-नीच के भेदभाव को जड़ से समाप्त कर दिया गया है, जिससे एक स्वस्थ समाज का निर्माण होता है।
बेगमपुरा की सुरक्षा और शांति इसकी मुख्य विशेषता (Key Feature) है। यहाँ न तो कोई किसी का दमन करता है और न ही किसी को अपनी संपत्ति खोने का डर होता है। गुरु जी ने एक ऐसी व्यवस्था का स्वप्न देखा जहाँ हर व्यक्ति को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर (Equal Opportunity) मिले। यह नगरी वास्तव में आत्मिक शांति (Spiritual Peace) और सामाजिक समृद्धि का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेगमपुरा (Begampura) वह अवस्था है जहाँ मनुष्य का मन विकारों से मुक्त होकर परमात्मा में लीन हो जाता है। यह केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि एक उच्च चेतना (Higher Consciousness) का प्रतीक है। जब समाज के सभी लोग करुणा और प्रेम (Compassion and Love) को अपना लेते हैं, तो यह धरती ही बेगमपुरा बन जाती है। गुरु रविदास जी का यह विजन आज भी दुनिया भर के समाज सुधारकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।