संत रविदास जी ने लगभग 120 वर्ष से अधिक का लंबा और सार्थक जीवन जिया। उनके महापरिनिर्वाण (Great Demise) के बारे में माना जाता है कि उन्होंने वाराणसी (Varanasi) में ही अपनी अंतिम सांस ली थी। उनके अंतिम समय में उनके हजारों अनुयायी, राजा और सामान्य लोग (Common People) उनके दर्शन के लिए एकत्र हुए थे। उन्होंने मरते समय भी शांति और वैश्विक कल्याण (Global Welfare) का संदेश दिया और अपने शिष्यों को आपसी प्रेम बनाए रखने की सलाह दी।
ऐतिहासिक मान्यताओं (Historical Beliefs) के अनुसार, उन्होंने विक्रम संवत 1597 के आसपास अपनी देह त्याग दी थी। उनके जाने के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी, क्योंकि समाज ने अपना एक सच्चा मार्गदर्शक (True Guide) खो दिया था। उनके अंतिम संस्कार के समय सभी धर्मों और जातियों के लोगों ने मिलकर उन्हें विदाई दी, जो उनके जीवन भर के एकता के प्रयासों की सफलता थी। वे शारीरिक रूप से चले गए, लेकिन उनके विचार अमर (Immortal Thoughts) हो गए।
उनके निधन के बाद उनकी शिक्षाओं को संकलित किया गया और 'रविदासिया धर्म' (Ravidassia Religion) के अनुयायियों ने उनकी वाणी को अपना आधार बनाया। सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब (Guru Granth Sahib) में उनके पदों को शामिल करना उनके व्यक्तित्व की महानता का सबसे बड़ा प्रमाण है। उनकी मृत्यु केवल एक देह का अंत था, लेकिन उनका दर्शन आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित है। वे एक ऐसे प्रकाश पुंज (Beaming Light) थे जिन्होंने कभी बुझना नहीं सीखा।
वाराणसी के जिस स्थान पर उन्होंने समाधि (Samadhi) ली, वह आज भी भक्तों के लिए एक ऊर्जा केंद्र (Energy Center) बना हुआ है। लोग वहाँ जाकर मानसिक शांति और प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उनके जीवन का अंतिम उद्देश्य भी यही था कि हर मनुष्य 'बेगमपुरा' (Begampura) जैसे दुखमुक्त समाज का हिस्सा बने। उन्होंने मृत्यु को एक उत्सव (Celebration) के रूप में देखा, जहाँ आत्मा का परमात्मा से अंतिम मिलन होता है।
संत रविदास जी का जीवन परिचय (Life Story) हमें सिखाता है कि जीवन की सार्थकता उसकी लंबाई में नहीं, बल्कि उसके योगदान (Contribution) में होती है। वे एक ऐसे महान पुरुष थे जिन्होंने मिट्टी को सोना बनाने की कला सिखाई। उनकी मृत्यु के सदियों बाद भी उनके नाम पर होने वाले आयोजन और त्यौहार उनकी उपस्थिति का अहसास कराते हैं। वे भारतीय अध्यात्म (Indian Spiritualism) के आकाश में एक ऐसे ध्रुव तारे की तरह हैं जो हमेशा चमकता रहेगा।