संत रविदास जी के भजनों में 'बेगमपुरा' (Begampura) एक ऐसे आदर्श नगर (Ideal City) का प्रतीक है जहाँ किसी को कोई गम या दुख न हो। उनके भजनों के माध्यम से वे एक ऐसे समाज की रचना करना चाहते थे जहाँ सामाजिक न्याय (Social Justice) और समानता का राज हो। बेगमपुरा का अर्थ है वह स्थान जो भय, चिंता और भेदभाव से मुक्त (Free from Discrimination) हो। यह अवधारणा वास्तव में एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) का प्राचीन विजन है।
उनके भजनों में वर्णित बेगमपुरा में न तो कोई अमीर है और न ही कोई गरीब, बल्कि सभी को अपनी मेहनत (Hard Work) का फल बराबर मिलता है। यहाँ कोई कर या लगान (Tax) नहीं है और न ही किसी पर कोई मानसिक दबाव है। गुरु जी ने संगीत और शब्दों के माध्यम से एक ऐसे स्वर्ग की कल्पना की जो इसी धरती पर संभव है। यह विचार शोषित वर्गों के लिए एक नई आशा की किरण (Ray of Hope) बनकर उभरा।
धार्मिक रूप से बेगमपुरा (Begampura) वह अवस्था है जहाँ भक्त अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लेता है। उनके भजनों में इस नगर का मार्ग सत्य, संतोष और सेवा (Truth, Contentment, and Service) से होकर गुजरता है। यहाँ किसी भी जाति या वर्ण के व्यक्ति को प्रवेश करने से नहीं रोका जाता। यह वैचारिक स्वतंत्रता (Freedom of Thought) और भाईचारे का सबसे बड़ा उदाहरण पेश करता है जो आज के लोकतंत्र (Democracy) के समान है।
संगीत और लय में पिरोए गए ये उपदेश समाज में व्याप्त ऊंच-नीच की कड़वाहट को कम करने का कार्य करते हैं। रविदास जी का मानना था कि जहाँ प्रेम और करुणा (Compassion) है, वहीं वास्तव में बेगमपुरा का वास है। उनके भजन हमें सिखाते हैं कि हमें अपनी बाहरी पहचान छोड़कर एक मानव (Human) के रूप में एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। यह दर्शन आज के वैश्विक समाज (Global Society) के लिए भी पूरी तरह प्रासंगिक है।
भक्तों के लिए बेगमपुरा (Begampura) का स्मरण करना ही मानसिक शांति का आधार है। उनके भजनों की गूँज हमें अन्याय के खिलाफ खड़ा होने और न्यायपूर्ण समाज (Just Society) बनाने की शक्ति देती है। गुरु रविदास जी ने अपने गीतों के माध्यम से यह संदेश दिया कि ईश्वर की भक्ति तभी सार्थक है जब हम मानवता की सेवा करें। बेगमपुरा की यह परिकल्पना उनके भजनों को कालजयी और क्रांतिकारी (Revolutionary) बनाती है।