नारी शिक्षा समर्थन (Women Education Support) महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार कार्यों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा था। उस समय के समाज में स्त्रियों को शिक्षा (Education) से वंचित रखा जाता था और उन्हें केवल घर के काम तक सीमित माना जाता था। स्वामी जी ने इस धारणा को चुनौती दी और वेदों के प्रमाण (Vedic Evidences) देकर यह सिद्ध किया कि प्राचीन काल में स्त्रियां शिक्षित और विदुषी (Scholars) होती थीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक शिक्षित नारी ही समाज और राष्ट्र की उन्नति (Progress) की आधारशिला है।
स्वामी दयानंद सरस्वती (Swami Dayanand Saraswati) का मानना था कि यदि माता शिक्षित नहीं होगी, तो वह अपनी संतान को अच्छे संस्कार (Values) नहीं दे पाएगी। नारी शिक्षा समर्थन (Women Education Support) के लिए उन्होंने कई स्थानों पर कन्या पाठशालाएं (Girls' Schools) खोलने की प्रेरणा दी। उन्होंने तर्क दिया कि ज्ञान (Knowledge) पर किसी एक लिंग का अधिकार नहीं है और परमात्मा ने बुद्धि सबको समान रूप से दी है। उनके इस साहसी कदम ने समाज की रूढ़िवादी सोच (Conservative Thinking) पर गहरा प्रहार किया।
उन्होंने विधवाओं और बेसहारा महिलाओं के लिए भी शिक्षा और स्वावलंबन (Self-reliance) का मार्ग प्रशस्त किया। नारी शिक्षा समर्थन (Women Education Support) के माध्यम से वे महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार (Equal Rights) और सम्मान दिलाना चाहते थे। स्वामी जी ने सती प्रथा और पर्दा प्रथा का विरोध किया क्योंकि ये प्रथाएं महिलाओं की आजादी और प्रगति में बाधक थीं। उनके प्रयासों के कारण ही महिलाओं ने समाज में अपनी पहचान (Identity) बनाना शुरू किया और सार्वजनिक जीवन में भाग लिया।
आर्य समाज (Arya Samaj) ने स्वामी जी के निधन के बाद भी नारी शिक्षा (Women Education) के मिशन को पूरी निष्ठा से जारी रखा। आज भारत में कन्या गुरुकुलों और महिला कॉलेजों (Women Colleges) का जो जाल फैला है, उसकी नींव दयानंद सरस्वती ने ही रखी थी। उन्होंने महिलाओं को यज्ञोपवीत (Sacred Thread) पहनने और वेदों का पाठ करने का अधिकार भी दिया, जो उस समय एक बहुत बड़ी सामाजिक क्रांति (Social Revolution) थी। उनके विचार महिलाओं को मानसिक दासता से मुक्त करने के लिए थे।
नारी शिक्षा समर्थन (Women Education Support) के प्रति उनके समर्पण ने आज की नारी को आत्मनिर्भर और सशक्त (Empowered) बनाया है। वे चाहते थे कि स्त्रियां भी आत्मरक्षा (Self-defense) और राजनीति जैसे विषयों में निपुण हों। दयानंद जी के विचार आज के महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) के आंदोलनों के प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने यह सिखाया कि जिस राष्ट्र में नारी का सम्मान और उसकी शिक्षा की उपेक्षा होती है, वह राष्ट्र कभी गौरव (Glory) प्राप्त नहीं कर सकता।