स्वामी दयानंद सरस्वती का हिंदू धर्म सुधार (Hindu Dharma Reform) पूरी तरह से 'बैक टू वेदाज' (Back to Vedas) के सिद्धांत पर आधारित था। उनके स्वामी दयानंद कोट्स (Swami Dayanand Quotes) में अक्सर यह कहा जाता है कि "सत्य को ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने में हमेशा तत्पर रहना चाहिए।" उन्होंने धर्म की व्याख्या करते हुए बताया कि जो पक्षपात रहित, न्याय और सत्य (Truth and Justice) पर आधारित है, वही धर्म है। उन्होंने उन सभी मान्यताओं को नकार दिया जो तर्क की कसौटी पर खरी नहीं उतरती थीं।
हिंदू धर्म सुधार (Hindu Dharma Reform) के लिए उन्होंने मूर्ति पूजा (Idol Worship), अवतारवाद और अनावश्यक बलि प्रथा का विरोध किया। उनके प्रसिद्ध विचार (Famous Quotes) यह सिखाते हैं कि "ईश्वर एक है और वह निराकार, सर्वशक्तिमान और न्यायकारी है।" उन्होंने ईश्वर की सच्ची उपासना (True Worship) के लिए अग्निहोत्र और परोपकार को श्रेष्ठ बताया। स्वामी जी ने धर्म को पाखंडों से मुक्त कर उसे एक शुद्ध आध्यात्मिक मार्ग (Spiritual Path) के रूप में प्रस्तुत किया।
स्वामी दयानंद कोट्स (Swami Dayanand Quotes) में स्वाभिमान और स्वदेश प्रेम (Patriotism) की गूँज मिलती है। उन्होंने कहा था कि "स्वदेशी राज्य विदेशी राज्य से हमेशा उत्तम होता है, चाहे विदेशी राज्य कितना भी सुखदायक क्यों न हो।" उनके इस दर्शन ने हिंदू धर्म सुधार (Hindu Dharma Reform) को राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन (Independence Movement) से जोड़ दिया। वे चाहते थे कि हर हिंदू अपनी संस्कृति और भाषा पर गर्व करे। उनके विचारों ने भारतीयों के मन से हीन भावना (Inferiority Complex) को समाप्त किया।
महिलाओं के अधिकारों पर उनके विचार बहुत प्रगतिशील (Progressive) थे। उन्होंने कहा था कि "जिस घर में नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।" हिंदू धर्म सुधार (Hindu Dharma Reform) के माध्यम से उन्होंने बाल विवाह को मिटाया और स्त्री शिक्षा (Women Education) की नींव रखी। स्वामी दयानंद कोट्स (Swami Dayanand Quotes) आज भी प्रेरणा देते हैं कि धर्म का अर्थ दूसरों की सेवा और दुखों का निवारण करना है। उन्होंने एक ऐसे समाज की कल्पना की जो शिक्षित और चरित्रवान (Character-driven) हो।
उनका दर्शन मनुष्य को आत्मनिर्भर और कर्मयोगी (Hard-working) बनाने पर केंद्रित था। उन्होंने सिखाया कि भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय पुरुषार्थ (Human Effort) करना ही मनुष्य का असली धर्म है। हिंदू धर्म सुधार (Hindu Dharma Reform) के उनके इन प्रयासों ने हिंदू धर्म को एक आधुनिक और वैज्ञानिक चेहरा प्रदान किया। स्वामी दयानंद सरस्वती के विचार (Thoughts) आज भी समाज के अंधकार को मिटाने के लिए प्रकाश स्तंभ (Lighthouse) की तरह कार्य कर रहे हैं।