महर्षि दयानंद सरस्वती के अनुसार सत्य और धर्म मार्ग (Path of Truth and Dharma) पर चलना ही मनुष्य का असली पुरुषार्थ (Human Effort) है। उन्होंने सिखाया कि धर्म वह नहीं है जो केवल पूजा-पाठ तक सीमित हो, बल्कि वह है जो न्याय (Justice) और सत्य पर टिका हो। सत्य बोलने (Speaking Truth) के साथ-साथ सत्य को आचरण में लाना भी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि हमें हमेशा अपनी आत्मा की आवाज (Voice of Soul) सुननी चाहिए, क्योंकि आत्मा कभी झूठ नहीं बोलती।
सत्य और धर्म मार्ग (Path of Truth and Dharma) के लिए उन्होंने 'दश लक्षण' (Ten Characteristics) बताए हैं, जिनमें धृति (Patience), क्षमा, दम और अस्तेय (Non-stealing) प्रमुख हैं। ये गुण मनुष्य को आंतरिक रूप से मजबूत (Strong) बनाते हैं। स्वामी जी का मानना था कि जो व्यक्ति दूसरों के दुखों को दूर करने का प्रयास करता है, वही वास्तव में धर्म के मार्ग पर है। उन्होंने परोपकार (Philanthropy) को ही सबसे बड़ी सेवा माना। यह मार्ग मनुष्य को मोह-माया और स्वार्थ से ऊपर उठाता है।
सत्य और धर्म मार्ग (Path of Truth and Dharma) पर चलने में सबसे बड़ी बाधा अज्ञानता और कुरीतियाँ (Evils) हैं। स्वामी दयानंद ने इन बाधाओं को दूर करने के लिए विद्या (Education) और स्वाध्याय (Self-study) का सुझाव दिया। उनका विचार था कि जब तक हम वेदों और ऋषियों के ग्रंथों को नहीं पढ़ेंगे, तब तक हम सत्य को नहीं पहचान पाएंगे। उन्होंने विवेक (Wisdom) के उपयोग पर जोर दिया ताकि हम सही और गलत (Right and Wrong) के बीच निर्णय ले सकें। यह मार्ग कठिन जरूर है, लेकिन यही वास्तविक सुख (True Happiness) प्रदान करता है।
सामाजिक स्तर पर सत्य और धर्म मार्ग (Path of Truth and Dharma) का अर्थ है—अन्याय के विरुद्ध खड़े होना। स्वामी जी स्वयं एक योद्धा (Warrior) थे जिन्होंने समाज की बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने सिखाया कि गलत को गलत कहना और सत्य का पक्ष लेना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति (Patriotism) है। धर्म का यह मार्ग व्यक्ति को निर्भय (Fearless) बनाता है। यह मार्ग हमें सिखाता है कि हमें सबके कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए क्योंकि 'वसुधैव कुटुंबकम' (The world is one family) ही हमारा मूल मंत्र है।
वर्तमान युग की अनैतिकता (Immorality) के बीच सत्य और धर्म मार्ग (Path of Truth and Dharma) ही हमारा उद्धार कर सकता है। दयानंद सरस्वती के विचार हमें यह शक्ति देते हैं कि हम प्रलोभनों (Temptations) के आगे न झुकें। उनके द्वारा दिखाए गए इस मार्ग पर चलकर ही हम एक आदर्श चरित्र (Ideal Character) का निर्माण कर सकते हैं। यह मार्ग केवल मोक्ष के लिए नहीं, बल्कि इस संसार को स्वर्ग बनाने के लिए भी आवश्यक है। सत्य की विजय (Victory of Truth) ही सृष्टि का शाश्वत नियम है।