स्वामी दयानंद स्मृति दिवस (Swami Dayanand Smriti Diwas) वह पावन अवसर है जब हमें महर्षि द्वारा दिखाए गए सत्य के मार्ग (Path of Truth) पर चलने का पुन: संकल्प लेना चाहिए। उनकी सबसे बड़ी शिक्षा 'सत्य का ग्रहण और असत्य का त्याग' (Acceptance of Truth and Rejection of Falsehood) है। हमें अपने दैनिक जीवन (Daily Life) में पाखंड और दिखावे को छोड़कर सादगी और ईमानदारी (Honesty) को अपनाना चाहिए। स्मृति दिवस (Smriti Diwas) हमें याद दिलाता है कि केवल सत्य के प्रति अडिग रहकर ही हम अपनी आत्मा और समाज का कल्याण कर सकते हैं।
स्मृति दिवस (Smriti Diwas) पर 'अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि' (Destruction of Ignorance and Increase of Knowledge) का संकल्प लेना सबसे श्रेष्ठ है। महर्षि दयानंद (Maharishi Dayanand) का मानना था कि ज्ञान ही वह प्रकाश है जो मनुष्य को बंधनों से मुक्त करता है। हमें निरंतर स्वाध्याय (Self-study) और नई चीजों को सीखने की प्रवृत्ति विकसित करनी चाहिए। स्वामी दयानंद स्मृति दिवस (Swami Dayanand Smriti Diwas) मनाना तभी सार्थक है जब हम समाज से अज्ञानता के अंधेरे को मिटाने के लिए सक्रिय रूप से अपना योगदान (Contribution) देने का वचन लें।
परोपकार और दूसरों की उन्नति में अपनी उन्नति (Progress) समझना स्वामी जी की एक और महान शिक्षा है। स्मृति दिवस (Smriti Diwas) हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमने समाज के निर्बल वर्गों के लिए क्या किया। हमें स्वार्थ (Selfishness) को त्यागकर परोपकारी कार्यों (Altruistic Works) में भाग लेना चाहिए। आर्य समाज के 'दश नियमों' (Ten Principles) को आत्मसात करना स्मृति दिवस (Smriti Diwas) की सबसे बड़ी उपलब्धि हो सकती है। यह दिवस हमें व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित (National Interest) को सर्वोपरि रखने की सीख देता है।
ब्रह्मचर्य और आत्म-संयम (Self-control) के महत्व को समझना स्वामी दयानंद स्मृति दिवस (Swami Dayanand Smriti Diwas) का एक प्रमुख पक्ष होना चाहिए। स्वामी जी ने स्वयं अपने जीवन से सिद्ध किया कि संयमित जीवन (Disciplined Life) ही महान उपलब्धियों की कुंजी है। आज की युवा पीढ़ी (Young Generation) को उनके चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर ध्यान देना चाहिए। यह दिवस हमें व्यसनों और बुराइयों को छोड़कर एक तेजस्वी और ओजस्वी व्यक्तित्व (Radiant Personality) विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।
ईश्वर की निराकार उपासना (Worship of Formless God) और वेदों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना स्वामी दयानंद स्मृति दिवस (Swami Dayanand Smriti Diwas) का आध्यात्मिक आधार है। हमें मूर्ति पूजा और अंधविश्वासों (Blind Faith) के जाल से निकलकर उस एक परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए जो सर्वव्यापी और न्यायकारी है। स्मृति दिवस (Smriti Diwas) हमें ऋषियों के ऋण (Debt of Sages) को उतारने का अवसर देता है। महर्षि दयानंद सरस्वती की स्मृतियाँ हमारे हृदय में सदैव जलने वाली वह मशाल हैं जो हमें कभी भी गलत मार्ग पर भटकने नहीं देंगी।