महा शिवरात्रि की रात ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) का प्रवाह बहुत तीव्र होता है, इसलिए शिवरात्रि ध्यान (Shivratri Meditation) करना आत्मिक शांति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए शांत स्थान पर रीढ़ की हड्डी (Spine) को सीधा रखकर बैठना चाहिए। अपनी आँखों को कोमलता से बंद करके श्वास (Breathing) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जैसे-जैसे मन स्थिर होता है, व्यक्ति को अपने भीतर एक गहरी शून्यता और दिव्य प्रकाश (Divine Light) का अनुभव होने लगता है।
ध्यान (Meditation) के दौरान 'ॐ' (Om) की ध्वनि का मानसिक जाप करने से मस्तिष्क की नसों को गहरा आराम (Deep Relaxation) मिलता है। शिवरात्रि ध्यान (Shivratri Meditation) केवल एकाग्रता बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि यह शरीर के सात चक्रों (Seven Chakras) को संतुलित करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब हम बाहरी कोलाहल से हटकर अंतर्मुखी (Inward) होते हैं, तो पुराने मानसिक तनाव और दबी हुई चिंताएँ (Anxiety) स्वतः ही समाप्त होने लगती हैं। यह साधना साधक को एक नई चेतना (New Consciousness) और स्फूर्ति प्रदान करती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो शिवरात्रि ध्यान (Shivratri Meditation) के समय ग्रहों की विशेष स्थिति मनुष्य के पीनियल ग्लैंड (Pineal Gland) को सक्रिय करने में मदद करती है। इस रात जागकर ध्यान करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making Power) बढ़ती है। ध्यान की गहराई में जाने पर शरीर में एंडोर्फिन जैसे खुशी देने वाले हार्मोन (Happiness Hormones) का स्राव होता है। यह अनुभव व्यक्ति को अवसाद और नकारात्मक विचारों (Negative Thoughts) से मुक्ति दिलाता है।
भक्तों के लिए शिवरात्रि ध्यान (Shivratri Meditation) महादेव के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का मार्ग है। भगवान शिव स्वयं महायोगी (Great Yogi) हैं, जो निरंतर समाधि में रहते हैं, अतः उनकी आराधना का सबसे प्रिय तरीका ध्यान ही है। इस साधना से मन की चंचलता दूर होती है और व्यक्ति में धैर्य (Patience) तथा सहनशीलता विकसित होती है। यह रात्रि अज्ञानता के अंधेरे को चीरकर ज्ञान के सूर्य (Sun of Knowledge) को प्रकट करने का स्वर्णिम अवसर है।
नियमित अभ्यास और श्रद्धा के साथ किया गया शिवरात्रि ध्यान (Shivratri Meditation) व्यक्ति के व्यक्तित्व (Personality) को पूरी तरह बदल सकता है। ध्यान के अंत में शांति पाठ करना और समस्त संसार के कल्याण (Welfare of the World) की कामना करना अनिवार्य है। जब हम ध्यान से बाहर आते हैं, तो हमें अपने भीतर एक अनोखा आत्मविश्वास (Confidence) और प्रसन्नता महसूस होती है। महादेव की यह मानसिक पूजा भक्त को मोक्ष (Liberation) के मार्ग की ओर ले जाती है।