छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा विकसित गनिमी कावा या छापामार युद्ध नीति (Guerilla Warfare Strategy) मुख्य रूप से गतिशीलता और अचानक हमले (Surprise Attack) पर आधारित थी। इस नीति का उपयोग उन्होंने तब किया जब उनके पास मुगलों की तुलना में छोटी सेना (Small Army) थी। वे जानते थे कि आमने-सामने के युद्ध में जीतना कठिन है, इसलिए उन्होंने सह्याद्रि की पहाड़ियों और घने जंगलों (Dense Forests) का लाभ उठाया। इस रणनीति के अंतर्गत मराठा सैनिक दुश्मन की रसद (Logistics) काट देते थे और उनके थकने का इंतजार करते थे।
सैन्य विज्ञान (Military Science) के अनुसार, गनिमी कावा नीति में भौगोलिक ज्ञान (Geographical Knowledge) सबसे बड़ी शक्ति थी। महाराज के सैनिक ऊबड़-खाबड़ रास्तों और गुप्त मार्गों (Secret Paths) से भली-भांति परिचित थे। वे बिजली की गति से हमला करते थे और दुश्मन के संभलने से पहले ही वापस पहाड़ों में ओझल हो जाते थे। यह नीति आज के कमांडो ऑपरेशंस (Commando Operations) और पर्वतीय युद्ध (Mountain Warfare) के लिए एक आधारभूत सिद्धांत मानी जाती है।
मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) भी इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। दुश्मन सेना के मन में यह डर बैठा दिया जाता था कि मराठा सैनिक कहीं से भी प्रकट हो सकते हैं। शिवाजी महाराज ने अपने गुप्तचर विभाग (Intelligence Department) को इतना मजबूत किया था कि उन्हें दुश्मन की हर हलचल की खबर पहले ही मिल जाती थी। सूचना की इस सटीकता (Accuracy of Information) ने उन्हें कम जनहानि के साथ बड़ी जीत हासिल करने में मदद की।
शिवाजी महाराज की इस युद्ध कला (Art of War) ने संसाधनों के कुशल प्रबंधन (Resource Management) पर जोर दिया। उन्होंने कभी भी अपनी सेना को अनावश्यक जोखिम में नहीं डाला। यदि उन्हें लगता था कि स्थिति प्रतिकूल है, तो वे पीछे हटने (Tactical Retreat) से भी नहीं कतराते थे ताकि बाद में अधिक शक्ति के साथ प्रहार किया जा सके। यह दूरदर्शिता ही थी जिसने मराठा साम्राज्य को औरंगजेब जैसी विशाल शक्ति के सामने अडिग खड़ा रखा।
आज की आधुनिक सेनाएं (Modern Armies) भी दुर्गम क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए महाराज की इन युक्तियों का अध्ययन करती हैं। गनिमी कावा का मुख्य उद्देश्य शत्रु को शारीरिक रूप से थकाने के साथ-साथ मानसिक रूप से तोड़ना भी था। इस रणनीति ने सिद्ध किया कि युद्ध केवल संख्या बल (Numerical Strength) से नहीं, बल्कि सही समय और सही स्थान के चुनाव से जीते जाते हैं। शिवाजी महाराज का यह सामरिक कौशल (Tactical Skill) विश्व इतिहास में बेजोड़ है।