अष्टप्रधान मंडल (Ashta Pradhan Mandal) शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित आठ मंत्रियों की एक परिषद थी, जो स्वराज्य के सुशासन (Good Governance) का आधार थी। इसमें प्रत्येक मंत्री को विशिष्ट विभाग (Department) सौंपा गया था, जिससे कार्यकुशलता बढ़ती थी। 'पेशवा' (Prime Minister) का कार्य पूरे प्रशासन की देखरेख करना और महाराज की अनुपस्थिति में नेतृत्व करना था। 'अमात्य' (Finance Minister) राज्य के आय-व्यय और वित्त प्रबंधन (Financial Management) के लिए उत्तरदायी थे, जो आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए अनिवार्य था।
मंत्रिमंडल में 'सचिव' (Secretary) का पद शाही पत्राचार और आदेशों (Royal Orders) को प्रमाणित करने के लिए था। 'मंत्री' या 'वाकयानवीस' गुप्तचर विभाग (Intelligence Department) और घरेलू मामलों की जानकारी महाराज तक पहुँचाते थे। 'सेनापति' (Commander-in-Chief) सेना के संगठन, प्रशिक्षण और युद्ध की रणनीतियों (War Strategies) के लिए जिम्मेदार थे। इस विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली (Decentralized Governance) ने भ्रष्टाचार को कम करने और त्वरित निर्णय लेने में बड़ी सहायता प्रदान की।
विदेश नीति (Foreign Policy) के प्रबंधन के लिए 'सुमंत' (Foreign Minister) का पद अत्यंत महत्वपूर्ण था, जो पड़ोसी सत्ताओं के साथ संधियाँ (Treaties) और संवाद करते थे। 'न्यायाधीश' (Chief Justice) और 'पंडितराव' (High Priest) क्रमशः कानूनी विवादों और धार्मिक मामलों (Religious Matters) का निपटारा करते थे। शिवाजी महाराज ने यह सुनिश्चित किया कि योग्यता (Merit) ही इन पदों पर नियुक्ति का एकमात्र पैमाना हो। यह व्यवस्था आधुनिक कैबिनेट प्रणाली (Cabinet System) की प्रारंभिक और सफल मिसाल मानी जाती है।
अष्टप्रधान मंडल (Ashta Pradhan Mandal) की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि मंत्रियों को जागीर के बदले नकद वेतन (Cash Salary) दिया जाता था। इससे मंत्रियों की निष्ठा सीधे राज्य के प्रति बनी रहती थी और वे स्वतंत्र शक्तिशाली गुट नहीं बना पाते थे। महाराज स्वयं इन सभी कार्यों की निगरानी करते थे और अंतिम निर्णय उन्हीं का होता था। इस प्रणाली ने एक लोक-कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना की, जहाँ न्याय और समानता सर्वोपरि थी।
आज के प्रशासनिक ढांचे (Administrative Framework) में भी अष्टप्रधान मंडल (Ashta Pradhan Mandal) के सिद्धांतों को देखा जा सकता है। यह परिषद हमें सिखाती है कि नेतृत्व (Leadership) केवल आदेश देना नहीं है, बल्कि सही लोगों को सही जिम्मेदारी सौंपना भी है। महाराज की इस दूरदर्शी सोच ने मराठा साम्राज्य को एक संगठित और अनुशासित शक्ति (Disciplined Power) बना दिया। यह मंडल स्वराज्य की सफलता का मुख्य स्तंभ सिद्ध हुआ।