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शिवाजी महाराज की मराठा सेना (Maratha Army) अपनी गतिशीलता और अनुशासन (Discipline) के लिए विश्वविख्यात थी। इस सेना का मुख्य आधार 'पायदल' (Infantry) और 'घुड़सवार' (Cavalry) थे। घुड़सवार सेना में दो वर्ग होते थे— 'बारगीर', जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और हथियार मिलते थे, और 'शिलेदार', जो स्वयं के संसाधनों के साथ सेवा देते थे। सेना का प्रत्येक सिपाही पहाड़ी क्षेत्रों (Hilly Terrains) में युद्ध करने में निपुण था, जिससे उन्हें मुगलों की भारी सेना पर बढ़त प्राप्त होती थी।

छापामार युद्ध पद्धति (Guerrilla Warfare Tactics), जिसे 'गनिमी कावा' कहा जाता था, मराठा सेना की सबसे बड़ी शक्ति थी। इसमें सैनिक अचानक हमला (Surprise Attack) करते थे और दुश्मन के संभलने से पहले ही पहाड़ों और जंगलों में ओझल हो जाते थे। यह रणनीति विशेष रूप से तब अपनाई जाती थी जब शत्रु की संख्या बहुत अधिक हो। महाराज ने सिखाया कि युद्ध केवल शक्ति से नहीं, बल्कि सही समय (Right Timing) और सही स्थान के चुनाव से जीते जाते हैं।

मराठा सेना (Maratha Army) का गुप्तचर विभाग (Spy System) 'बहिर्जी नाइक' के नेतृत्व में अत्यंत सक्रिय था। युद्ध से पहले दुश्मन की हर छोटी जानकारी जैसे रसद मार्ग (Supply Routes) और सैन्य कमजोरी का पता लगाया जाता था। सैनिकों को सख्त आदेश थे कि वे किसानों का उत्पीड़न न करें और महिलाओं का सम्मान (Respect for Women) करें। इस नैतिक आचरण (Ethical Conduct) के कारण जनता भी सेना की गुप्त रूप से सहायता करती थी, जिससे शत्रु सेना भ्रमित हो जाती थी।

रसद प्रबंधन (Logistics Management) में मराठा सेना बहुत स्वावलंबी थी। वे भारी भरकम सामान ढोने के बजाय हल्का सामान रखते थे ताकि तेजी से आगे बढ़ सकें। किलों (Forts) को आधार शिविर के रूप में उपयोग किया जाता था, जहाँ हथियार और अनाज का पर्याप्त भंडार (Stock) होता था। ऊँचे पहाड़ों पर चढ़ने और रस्सियों के सहारे किलों को फतह करने की कला ने उन्हें अपराजेय बना दिया था। उनकी यह चपलता ही उनके विजय अभियानों की कुंजी थी।

अंततः मराठा सेना (Maratha Army) ने यह सिद्ध किया कि देशभक्ति (Patriotism) और बुद्धिमानी से किसी भी बड़ी सत्ता को चुनौती दी जा सकती है। शिवाजी महाराज ने एक ऐसी सैन्य परंपरा (Military Tradition) शुरू की जिसने आगे चलकर संपूर्ण भारत में मराठा प्रभाव का विस्तार किया। आज भी आधुनिक सेनाएं छापामार युद्ध (Guerrilla War) के गुर सीखने के लिए महाराज की रणनीतियों का अध्ययन करती हैं। यह सेना स्वराज्य की ढाल और गौरव का अटूट हिस्सा थी।

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शिवाजी महाराज की मराठा सेना (Maratha Army) अपनी गतिशीलता और अनुशासन (Discipline) के लिए विश्वविख्यात थी। इस सेना का मुख्य आधार 'पायदल' (Infantry) और 'घुड़सवार' (Cavalry) थे। घुड़सवार सेना में दो वर्ग होते थे— 'बारगीर', जिन्हें राज्य की ओर से घोड़े और हथियार मिलते थे, और 'शिलेदार', जो स्वयं के संसाधनों के साथ सेवा देते थे। सेना का प्रत्येक सिपाही पहाड़ी क्षेत्रों (Hilly Terrains) में युद्ध करने में निपुण था, जिससे उन्हें मुगलों की भारी सेना पर बढ़त प्राप्त होती थी।

छापामार युद्ध पद्धति (Guerrilla Warfare Tactics), जिसे 'गनिमी कावा' कहा जाता था, मराठा सेना की सबसे बड़ी शक्ति थी। इसमें सैनिक अचानक हमला (Surprise Attack) करते थे और दुश्मन के संभलने से पहले ही पहाड़ों और जंगलों में ओझल हो जाते थे। यह रणनीति विशेष रूप से तब अपनाई जाती थी जब शत्रु की संख्या बहुत अधिक हो। महाराज ने सिखाया कि युद्ध केवल शक्ति से नहीं, बल्कि सही समय (Right Timing) और सही स्थान के चुनाव से जीते जाते हैं।

मराठा सेना (Maratha Army) का गुप्तचर विभाग (Spy System) 'बहिर्जी नाइक' के नेतृत्व में अत्यंत सक्रिय था। युद्ध से पहले दुश्मन की हर छोटी जानकारी जैसे रसद मार्ग (Supply Routes) और सैन्य कमजोरी का पता लगाया जाता था। सैनिकों को सख्त आदेश थे कि वे किसानों का उत्पीड़न न करें और महिलाओं का सम्मान (Respect for Women) करें। इस नैतिक आचरण (Ethical Conduct) के कारण जनता भी सेना की गुप्त रूप से सहायता करती थी, जिससे शत्रु सेना भ्रमित हो जाती थी।

रसद प्रबंधन (Logistics Management) में मराठा सेना बहुत स्वावलंबी थी। वे भारी भरकम सामान ढोने के बजाय हल्का सामान रखते थे ताकि तेजी से आगे बढ़ सकें। किलों (Forts) को आधार शिविर के रूप में उपयोग किया जाता था, जहाँ हथियार और अनाज का पर्याप्त भंडार (Stock) होता था। ऊँचे पहाड़ों पर चढ़ने और रस्सियों के सहारे किलों को फतह करने की कला ने उन्हें अपराजेय बना दिया था। उनकी यह चपलता ही उनके विजय अभियानों की कुंजी थी।

अंततः मराठा सेना (Maratha Army) ने यह सिद्ध किया कि देशभक्ति (Patriotism) और बुद्धिमानी से किसी भी बड़ी सत्ता को चुनौती दी जा सकती है। शिवाजी महाराज ने एक ऐसी सैन्य परंपरा (Military Tradition) शुरू की जिसने आगे चलकर संपूर्ण भारत में मराठा प्रभाव का विस्तार किया। आज भी आधुनिक सेनाएं छापामार युद्ध (Guerrilla War) के गुर सीखने के लिए महाराज की रणनीतियों का अध्ययन करती हैं। यह सेना स्वराज्य की ढाल और गौरव का अटूट हिस्सा थी।
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