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छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक (Coronation) भारतीय इतिहास की एक युगांतरकारी घटना है, जो 6 जून 1674 को रायगढ़ किले (Raigad Fort) में संपन्न हुई थी। इस समारोह के मुख्य पुरोहित महान विद्वान 'गागा भट्ट' (Gaga Bhatt) थे, जिन्होंने उन्हें 'क्षत्रिय कुलवतंस' और 'छत्रपति' की उपाधियों से अलंकृत किया। यह केवल एक राजा का तिलक नहीं था, बल्कि विदेशी सत्ताओं की दासता को ठुकराकर एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र (Sovereign Nation) की घोषणा थी। राज्याभिषेक (Coronation) ने मराठा साम्राज्य को कानूनी मान्यता प्रदान की और जनता में आत्मविश्वास का संचार किया।

समारोह के दौरान सप्तसिंधु और विभिन्न पवित्र नदियों (Holy Rivers) के जल से महाराज का अभिषेक किया गया। उन्होंने सोने के सिंहासन (Golden Throne) पर विराजमान होकर 'हिंदवी स्वराज्य' (Hindavi Swaraj) की रक्षा का संकल्प लिया। इस अवसर पर उन्होंने नई मुद्रा 'शिवराई' (Shivrai Coin) और एक नया कैलेंडर (Calendar) भी जारी किया। राज्याभिषेक (Coronation) ने यह सिद्ध कर दिया कि बिना किसी सुल्तान की अनुमति के भी एक स्वदेशी शासक अपना राज्य स्थापित कर सकता है। यह घटना आत्म-सम्मान (Self-respect) और स्वतंत्रता का सर्वोच्च प्रतीक बन गई।

प्रशासनिक दृष्टि से राज्याभिषेक (Coronation) के बाद ही 'अष्टप्रधान मंडल' (Council of Eight Ministers) को आधिकारिक स्वरूप मिला। महाराज ने संस्कृत भाषा (Sanskrit Language) को बढ़ावा देने के लिए राजव्यवहार कोश तैयार करवाया। इस समारोह ने मराठों को एक नई पहचान दी और उन्हें एक सूत्र में पिरोया। राज्याभिषेक (Coronation) के बाद विदेशी शक्तियों, जैसे अंग्रेज और पुर्तगाली, को भी महाराज की शक्ति और स्वायत्तता (Autonomy) को स्वीकार करना पड़ा। यह भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय था।

समारोह के समय रायगढ़ को दुल्हन की तरह सजाया गया था और हज़ारों की संख्या में प्रजा अपने 'रयतेचा राजा' (King of People) के दर्शन के लिए उमड़ी थी। शिवाजी महाराज ने राज्याभिषेक (Coronation) के माध्यम से यह संदेश दिया कि उनका शासन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि आम जनता का है। उन्होंने न्याय और धर्म (Justice and Dharma) की स्थापना के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। इस दिन से मराठा साम्राज्य की नींव और भी अधिक सुदृढ़ हो गई, जिसने भविष्य में मुगलों की नींव हिला दी।

आज भी रायगढ़ किले पर राज्याभिषेक (Coronation) की वर्षगाँठ बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि निरंतर संघर्ष (Continuous Struggle) और अटूट संकल्प से ही स्वराज्य की प्राप्ति होती है। महाराज का राज्याभिषेक (Coronation) केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह भारतीय संस्कृति (Indian Culture) और गौरव के पुनरुत्थान का दिन था। उनकी यह दूरदर्शिता ही थी कि उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।

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छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक (Coronation) भारतीय इतिहास की एक युगांतरकारी घटना है, जो 6 जून 1674 को रायगढ़ किले (Raigad Fort) में संपन्न हुई थी। इस समारोह के मुख्य पुरोहित महान विद्वान 'गागा भट्ट' (Gaga Bhatt) थे, जिन्होंने उन्हें 'क्षत्रिय कुलवतंस' और 'छत्रपति' की उपाधियों से अलंकृत किया। यह केवल एक राजा का तिलक नहीं था, बल्कि विदेशी सत्ताओं की दासता को ठुकराकर एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र (Sovereign Nation) की घोषणा थी। राज्याभिषेक (Coronation) ने मराठा साम्राज्य को कानूनी मान्यता प्रदान की और जनता में आत्मविश्वास का संचार किया।

समारोह के दौरान सप्तसिंधु और विभिन्न पवित्र नदियों (Holy Rivers) के जल से महाराज का अभिषेक किया गया। उन्होंने सोने के सिंहासन (Golden Throne) पर विराजमान होकर 'हिंदवी स्वराज्य' (Hindavi Swaraj) की रक्षा का संकल्प लिया। इस अवसर पर उन्होंने नई मुद्रा 'शिवराई' (Shivrai Coin) और एक नया कैलेंडर (Calendar) भी जारी किया। राज्याभिषेक (Coronation) ने यह सिद्ध कर दिया कि बिना किसी सुल्तान की अनुमति के भी एक स्वदेशी शासक अपना राज्य स्थापित कर सकता है। यह घटना आत्म-सम्मान (Self-respect) और स्वतंत्रता का सर्वोच्च प्रतीक बन गई।

प्रशासनिक दृष्टि से राज्याभिषेक (Coronation) के बाद ही 'अष्टप्रधान मंडल' (Council of Eight Ministers) को आधिकारिक स्वरूप मिला। महाराज ने संस्कृत भाषा (Sanskrit Language) को बढ़ावा देने के लिए राजव्यवहार कोश तैयार करवाया। इस समारोह ने मराठों को एक नई पहचान दी और उन्हें एक सूत्र में पिरोया। राज्याभिषेक (Coronation) के बाद विदेशी शक्तियों, जैसे अंग्रेज और पुर्तगाली, को भी महाराज की शक्ति और स्वायत्तता (Autonomy) को स्वीकार करना पड़ा। यह भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय था।

समारोह के समय रायगढ़ को दुल्हन की तरह सजाया गया था और हज़ारों की संख्या में प्रजा अपने 'रयतेचा राजा' (King of People) के दर्शन के लिए उमड़ी थी। शिवाजी महाराज ने राज्याभिषेक (Coronation) के माध्यम से यह संदेश दिया कि उनका शासन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि आम जनता का है। उन्होंने न्याय और धर्म (Justice and Dharma) की स्थापना के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। इस दिन से मराठा साम्राज्य की नींव और भी अधिक सुदृढ़ हो गई, जिसने भविष्य में मुगलों की नींव हिला दी।

आज भी रायगढ़ किले पर राज्याभिषेक (Coronation) की वर्षगाँठ बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि निरंतर संघर्ष (Continuous Struggle) और अटूट संकल्प से ही स्वराज्य की प्राप्ति होती है। महाराज का राज्याभिषेक (Coronation) केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह भारतीय संस्कृति (Indian Culture) और गौरव के पुनरुत्थान का दिन था। उनकी यह दूरदर्शिता ही थी कि उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।
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