शिवाजी महाराज की वीरता (Shivaji Maharaj Ki Veerta) के अनेक प्रसंग इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं, जिनमें अफजल खान का वध सबसे प्रमुख है। बीजापुर के विशालकाय सेनापति अफजल खान ने उन्हें धोखे से मारने की साजिश रची थी, परंतु महाराज ने अपनी बुद्धिमत्ता (Intelligence) से उसका अंत कर दिया। उन्होंने 'वाघ नख' (Tiger Claws) का उपयोग कर जिस प्रकार खान के अहंकार को चकनाचूर किया, वह उनकी वीरता का चरम उदाहरण है। शिवाजी महाराज की वीरता (Shivaji Maharaj Ki Veerta) ने दक्षिण के सुल्तानों के मन में मराठों के प्रति खौफ पैदा कर दिया।
पुणे में शाइस्ता खान पर किया गया सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) भी उनकी बहादुरी का एक अनोखा प्रमाण है। लाखों की मुगल सेना के बीच लाल महल में घुसकर शाइस्ता खान की उंगलियां काट देना किसी चमत्कार (Miracle) से कम नहीं था। इस साहसिक हमले ने मुगलों की सुरक्षा व्यवस्था (Security System) की धज्जियाँ उड़ा दीं और औरंगजेब को गहरा झटका दिया। शिवाजी महाराज की वीरता (Shivaji Maharaj Ki Veerta) के कारण ही उन्हें 'पहाड़ी चूहा' कहा जाने लगा, जो कहीं से भी हमला कर गायब हो सकते थे।
पन्हाला किले की घेराबंदी से बच निकलना और बाजीप्रभु देशपांडे का पावनखिंड (Pavankhind) में बलिदान महाराज की रणनीतिक वीरता को दर्शाता है। जब दुश्मन की सेना ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया था, तब उन्होंने अपनी फुर्ती से सबको चकमा दिया। शिवाजी महाराज की वीरता (Shivaji Maharaj Ki Veerta) केवल शारीरिक बल तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह उनकी अजेय मानसिक शक्ति (Mental Strength) का परिणाम थी। उन्होंने हताश हो चुकी प्रजा में फिर से लड़ने का जज्बा पैदा किया, जो उनकी सबसे बड़ी जीत थी।
समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए जलदुर्गों (Sea Forts) का निर्माण और नौसेना का गठन भी उनकी वीरता का एक पहलू है। उन्होंने सिद्ध किया कि भारत की रक्षा केवल जमीन से नहीं, बल्कि समुद्र (Sea) से भी होनी चाहिए। जंजीरा के सिद्दियों और अंग्रेजों को चुनौती देकर उन्होंने स्वराज्य की सीमाओं को सुरक्षित किया। शिवाजी महाराज की वीरता (Shivaji Maharaj Ki Veerta) ने भारत को एक नई सैन्य दृष्टि (Military Vision) प्रदान की, जिसने आने वाली सदियों तक विदेशी ताकतों को रोक कर रखा।
सूरत पर आक्रमण और मुगलों के खजाने को जब्त करना उनके साहस का एक और बड़ा उदाहरण है। उन्होंने बार-बार औरंगजेब की सत्ता को चुनौती दी और यह साबित किया कि कोई भी साम्राज्य (Empire) जनशक्ति से बड़ा नहीं होता। शिवाजी महाराज की वीरता (Shivaji Maharaj Ki Veerta) का उद्देश्य व्यक्तिगत प्रसिद्धि नहीं, बल्कि स्वराज्य की स्थापना और प्रजा का संरक्षण (Protection of People) था। उनकी यह गौरवगाथा आज भी हर भारतीय की रगों में जोश भर देती है।