नकाथेन (Nakatheng) एक अत्यंत प्यारी परंपरा है जहाँ छोटे बच्चे समूह बनाकर अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों से उपहार या धन (Money) मांगते हैं। यह प्रथा होली के दौरान मिलने वाली 'ईदी' या अन्य त्योहारों के दान की तरह है, जो बच्चों में सामाजिक जुड़ाव (Social Bonding) बढ़ाती है। बच्चों का उत्साह और उनकी मासूमियत याओसांग (Yaosang) के माहौल को और भी अधिक खुशनुमा बना देती है। इस धन का उपयोग वे अपनी छोटी-छोटी खुशियों और खेल सामग्री खरीदने के लिए करते हैं।
सामुदायिक भोज (Community Feast) इस त्योहार का एक और महत्वपूर्ण पहलू है जहाँ पूरा मोहल्ला एक साथ बैठकर भोजन करता है। इस भोज में पारंपरिक मणिपुरी व्यंजन (Manipuri Cuisine) जैसे 'इरोंबा' और 'सिंगजू' परोसे जाते हैं। एक ही छत के नीचे बैठकर भोजन करने से आपसी मतभेद दूर होते हैं और भाईचारा (Brotherhood) बढ़ता है। यह सामूहिक भोजन (Collective Dining) मैतेई समाज की एकता और अखंडता का प्रतीक है।
रसोई के कार्यों में पुरुष और महिलाएं मिलकर हाथ बटाते हैं, जो लैंगिक समानता (Gender Equality) का एक सुंदर उदाहरण पेश करता है। खाना पकाने से लेकर परोसने तक, हर कोई अपनी सेवा (Service) देना चाहता है। ताजी सब्जियों और स्थानीय मसालों (Local Spices) से तैयार किया गया भोजन स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम होता है। याओसांग (Yaosang) के दौरान भोजन साझा करना पुण्य का कार्य माना जाता है।
भोज के बाद अक्सर भजन-कीर्तन और लोक संगीत (Folk Music) का कार्यक्रम होता है। बड़े-बुजुर्ग नई पीढ़ी को परिवार के मूल्यों और परंपराओं के बारे में बताते हैं। यह आपसी संवाद (Dialogue) संस्कृति के हस्तांतरण के लिए बहुत जरूरी है। नकाथेन (Nakatheng) से शुरू हुई खुशियाँ सामुदायिक भोज के साथ एक उत्सव का रूप ले लेती हैं। यह त्योहार लोगों के पेट और मन दोनों को संतुष्ट करता है।
आधुनिकता के बावजूद मणिपुर के लोगों ने नकाथेन (Nakatheng) और सामुदायिक भोज की सादगी को बनाए रखा है। ये रस्में सिखाती हैं कि असली खुशी अकेले में नहीं, बल्कि सबके साथ मिलकर (Togetherness) रहने में है। याओसांग (Yaosang) का यह सामाजिक ढांचा राज्य के सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूती प्रदान करता है। यह प्रेम, आदर और सद्भाव (Respect and Harmony) का एक अनूठा संगम है जो हर साल लोगों को करीब लाता है।