मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) के लिए शब-ए-क़द्र (Shab-i-Qadr) की इबादत का विशेष महत्व है, जिसे वे अपने घरों की शुद्धता (Purity of Homes) और शांति में पूरा करती हैं। घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी महिलाएं अल्लाह का ज़िक्र (Remembrance) कर सकती हैं। वे अपने घर के एक साफ कोने को 'मुसल्ला' (Prayer Place) बनाकर वहां नफ़िल नमाज़ें और क़ुरआन की तिलावत कर सकती हैं। अल्लाह नीयत (Intention) को देखता है, और घर पर की गई उनकी इबादत भी उतनी ही मकबूल है।
महिलाओं को चाहिए कि वे रमज़ान की ताक रातों में अपने बच्चों को भी शब-ए-क़द्र (Shab-i-Qadr) की अहमियत बताएं और उन्हें छोटी दुआएं याद कराएं। इबादत के दौरान दुरूद शरीफ़ (Salutation to Prophet) का कसरत से पढ़ना घर में रहमत लाता है। यदि कोई महिला अपनी शारीरिक परिस्थितियों (Physical Conditions) के कारण नमाज़ नहीं पढ़ सकती, तो वह ज़िक्र और तस्बीह के ज़रिए इस रात का फ़ायदा उठा सकती है। अल्लाह का दरवाज़ा सबके लिए खुला है।
घर पर इबादत (Worship at Home) करते समय सादगी और खुशबू (Fragrance) का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि रूहानी माहौल बना रहे। महिलाएं अपनी दुआओं में परिवार की सलामती, बच्चों की तरबियत और बीमारों की शफ़ा (Healing for Sick) के लिए रो-रो कर इल्तिजा करती हैं। शब-ए-क़द्र (Shab-i-Qadr) की रात में उनका जागना और अल्लाह को याद करना पूरे परिवार के लिए बरकत का कारण बनता है। वे अपनी विशेष दुआओं के ज़रिए घर को जन्नत (Paradise) बना सकती हैं।
सहज इबादत (Easy Worship) के लिए महिलाएं तस्बीह-ए-फातिमी और सूरह यासीन का पाठ कर सकती हैं। रात के खाने और सहरी (Pre-dawn Meal) की तैयारी को भी इबादत की नीयत से करना सवाब का काम है। शब-ए-क़द्र (Shab-i-Qadr) के दौरान दान-पुण्य (Charity) के तौर पर पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों को खाना पहुँचाना भी एक बड़ी नेकी है। महिलाओं का धैर्य और सेवा भाव अल्लाह को अत्यंत प्रिय है।
अंततः, शब-ए-क़द्र (Shab-i-Qadr) की रात महिलाओं के लिए आत्म-मंथन (Introspection) का समय है। वे अपनी कमियों को दूर करने और एक नेक ख़ातून (Righteous Woman) बनने का इरादा करती हैं। अल्लाह उनकी हर उस आह को सुनता है जो सज़दे में निकलती है। घर पर की गई इबादत में जो एकांत (Privacy) मिलता है, वह इंसान को अल्लाह के और भी क़रीब ले जाता है। यह रात हर मोमिना के लिए उम्मीदों और खुशियों का पैग़ाम लेकर आती है।