ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr) और सेंवई (Sewai) का रिश्ता इतना गहरा है कि इसे अक्सर 'सेंवई वाली ईद' भी कहा जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बन चुकी है। सेंवई को दूध, शक्कर और सूखे मेवों (Dry Fruits) के साथ पकाकर 'शीर खुरमा' (Sheer Khurma) तैयार किया जाता है। 'शीर' का अर्थ है दूध और 'खुरमा' का अर्थ है खजूर। यह मीठा व्यंजन उत्सव में मिठास और स्वाद (Taste and Sweetness) घोल देता है।
भारत के विभिन्न हिस्सों में सेंवई (Sewai) बनाने के अलग-अलग तरीके प्रचलित हैं। कहीं इसे दूध के साथ बनाया जाता है तो कहीं 'किमामी सेंवई' के रूप में सूखा और चाशनी वाला बनाया जाता है। केसर, इलायची और चांदी के वर्क का उपयोग इसे और भी शाही (Royal) बना देता है। ईद के दिन आने वाले मेहमानों को सबसे पहले सेंवई ही परोसी जाती है। यह व्यंजन आतिथ्य सत्कार (Hospitality) की एक लंबी परंपरा का वाहक है।
ऐतिहासिक रूप से माना जाता है कि मुग़ल काल (Mughal Era) के दौरान इन मीठे व्यंजनों को और भी अधिक लोकप्रियता मिली। सेंवई की बनावट और उसका स्वाद उत्सव के आनंद को बढ़ा देता है। इसके अलावा कई घरों में बिरयानी, कबाब और अन्य लजीज मांसाहारी व्यंजन (Non-vegetarian Dishes) भी तैयार किए जाते हैं। खान-पान की यह विविधता (Diversity) ईद के त्योहार को एक शाही दावत में बदल देती है।
बाज़ारों में रमज़ान के अंतिम सप्ताह में सेंवई (Sewai) की दुकानों पर भारी भीड़ रहती है। बनारसी सेंवई, फेनी और हाथ से बनी बारीक सेंवई की बहुत मांग (High Demand) रहती है। लोग अपने खास दोस्तों और पड़ोसियों को घर बुलाकर इन पकवानों का स्वाद चखाते हैं। यह भोजन के माध्यम से जुड़ने और प्रेम बांटने का एक शानदार जरिया है। सेंवई की खुशबू ईद की सुबह को और भी खुशनुमा बना देती है।
मीठा खाना सुन्नत भी माना जाता है, क्योंकि पैगंबर साहब भी ईद की नमाज़ पर जाने से पहले खजूर (Dates) या कुछ मीठा ग्रहण करते थे। सेंवई (Sewai) उसी परंपरा का एक आधुनिक और सांस्कृतिक रूप है। यह व्यंजन पीढ़ियों से एक समान उत्साह के साथ बनाया जा रहा है। ईद का यह स्वाद (Flavor) केवल ज़बान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह यादों में हमेशा के लिए बस जाता है। मीठी सेंवई वास्तव में रिश्तों में घुली मिठास का प्रतीक है।