नौजवान भारत सभा (Naujawan Bharat Sabha) की स्थापना मार्च 1926 में भगत सिंह द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के युवाओं को संगठित करना और उनमें राष्ट्रवादी चेतना (Nationalist Consciousness) पैदा करना था। यह संगठन केवल आज़ादी की बात नहीं करता था, बल्कि यह सामाजिक कुरीतियों जैसे अस्पृश्यता (Untouchability) और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ भी आवाज़ उठाता था। इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (Independence Struggle) को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।
संगठन के सदस्य गाँव-गाँव जाकर किसानों और मजदूरों (Workers) को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते थे। भगत सिंह का मानना था कि जब तक आम जनता क्रांति (Revolution) का हिस्सा नहीं बनेगी, तब तक पूर्ण स्वराज (Complete Independence) प्राप्त करना असंभव है। नौजवान भारत सभा (Naujawan Bharat Sabha) ने सार्वजनिक सभाओं और पर्चों के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्यवाद (Imperialism) के असली चेहरे को बेनकाब किया। इसने युवाओं में बलिदान और त्याग की भावना को कूट-कूट कर भर दिया।
इस सभा ने साइमन कमीशन (Simon Commission) के विरोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लाला लाजपत राय के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में इस संगठन के कार्यकर्ता अग्रिम पंक्ति में थे। जब ब्रिटिश पुलिस ने उन पर लाठियां बरसाईं, तो नौजवान भारत सभा (Naujawan Bharat Sabha) ने ही प्रतिशोध (Revenge) की योजना बनाई। यह संगठन ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों (Intelligence Agencies) के लिए सिरदर्द बन गया था क्योंकि इसकी गतिविधियां बहुत ही गुप्त और प्रभावी थीं।
संगठन का मुख्य मंत्र 'समानता और भाईचारा' था। वे चाहते थे कि आज़ाद भारत (Free India) में हर धर्म और जाति के लोग मिलकर रहें। इसके सदस्य 'अछूत' समझे जाने वाले लोगों के साथ सामूहिक भोज (Community Feast) का आयोजन करते थे, जो उस समय के समाज में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम था। नौजवान भारत सभा (Naujawan Bharat Sabha) ने यह साबित किया कि आज़ादी की लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार (Social Reform) का भी एक माध्यम है।
ब्रिटिश सरकार ने अंततः इस संगठन पर प्रतिबंध (Ban) लगा दिया, लेकिन इसके विचारों को नहीं दबा सकी। इसके सदस्यों ने बाद में अन्य क्रांतिकारी समूहों के साथ मिलकर काम जारी रखा। शहीद दिवस (Shaheed Diwas) के अवसर पर इस संगठन की कार्यप्रणाली पर चर्चा करना अनिवार्य है क्योंकि इसने ही भगत सिंह जैसे नेतृत्व को तैयार किया था। आज भी युवाओं को ऐसे संगठनों की आवश्यकता है जो उन्हें राष्ट्र की एकता (Unity of Nation) और प्रगति के लिए प्रेरित कर सकें।