अयोध्या के चारों भाई—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न (Ram Lakshman Bharat Shatrughna)—संसार के लिए भ्रातृ-प्रेम (Brotherly Love) का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनके बीच का संबंध निस्वार्थता और त्याग की नींव पर टिका हुआ था। जहाँ राम ने पिता के वचन के लिए राज्य छोड़ा, वहीं भरत ने बड़े भाई का अधिकार होने के कारण सिंहासन पर बैठने से मना कर दिया और उनकी चरण पादुकाएं (Sandals) रखकर शासन किया। यह त्याग की भावना हमें पारिवारिक एकता (Family Unity) का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाती है।
लक्ष्मण का प्रेम सेवा और सुरक्षा (Protection and Service) पर आधारित था, जिन्होंने 14 वर्षों तक निद्रा का त्याग कर अपने बड़े भाई और भाभी की सेवा की। शत्रुघ्न ने भी भरत के साथ रहकर राज्य की जिम्मेदारियों को निभाया और अपने कर्तव्यों (Duties) के प्रति अडिग रहे। राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न (Ram Lakshman Bharat Shatrughna) के बीच कभी भी संपत्ति या सत्ता (Power) को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ, बल्कि हर कोई दूसरे को श्रेष्ठ साबित करने में लगा रहा। यह आज के संपत्ति विवादों (Property Disputes) से जूझते परिवारों के लिए एक बड़ी सीख है।
परिवार के इन चार स्तंभों ने सिखाया कि सुख और दुख में एकजुट रहना ही परिवार की असली ताकत है। उनके चरित्र हमें सिखाते हैं कि बड़ों के प्रति सम्मान और छोटों के प्रति स्नेह (Respect and Affection) ही घर को स्वर्ग बनाता है। राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न (Ram Lakshman Bharat Shatrughna) के आदर्शों ने ही अयोध्या को 'राम राज्य' बनाने में सहायता की। उनकी परस्पर समझ (Mutual Understanding) इतनी गहरी थी कि बिना कहे ही वे एक-दूसरे की मनःस्थिति को समझ लेते थे।
धार्मिक दृष्टिकोण से इन चारों भाइयों को विष्णु के विभिन्न स्वरूपों (Forms of Vishnu) का अंश माना जाता है। राम पूर्ण अवतार थे, जबकि लक्ष्मण शेषनाग, भरत शंख और शत्रुघ्न सुदर्शन चक्र के अवतार माने जाते हैं। इनका साथ होना यह दर्शाता है कि धर्म की स्थापना के लिए विभिन्न शक्तियों का सामंजस्य (Harmony) आवश्यक है। राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न (Ram Lakshman Bharat Shatrughna) की यह चौकड़ी भारतीय संस्कृति में आदर्श परिवार (Ideal Family) की परिभाषा बन गई है।
वर्तमान समाज में जहाँ एकल परिवार (Nuclear Families) का चलन बढ़ रहा है, वहाँ इन भाइयों की कथा हमें संयुक्त परिवार और साझा जिम्मेदारियों (Shared Responsibilities) का महत्व बताती है। यह प्रेम हमें सिखाता है कि हृदय की विशालता ही वास्तव में धनवान होने की निशानी है। राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न (Ram Lakshman Bharat Shatrughna) का नाम लेने मात्र से ही मन में प्रेम और शांति का संचार होता है। यह भ्रातृ-प्रेम युगों-युगों तक मानवता को प्रेरित करता रहेगा।