महावीर जयंती (Mahavir Jayanti) चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान महावीर के जन्म कल्याणक (Birth Anniversary) के रूप में मनाई जाती है। इस दिन की शुरुआत जैन मंदिरों (Jain Temples) में विशेष प्रार्थनाओं और अभिषेक के साथ होती है। श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर मंदिरों में भगवान महावीर की प्रतिमा का जल और दूध से प्रक्षाल (Ablution) करते हैं। यह दिन समस्त जैन धर्मावलंबियों के लिए आध्यात्मिक उल्लास (Spiritual Joy) और आत्म-शुद्धि का पर्व है।
उत्सव (Festival) का सबसे प्रमुख आकर्षण 'रथ यात्रा' (Chariot Procession) होती है, जहाँ भगवान की प्रतिमा को एक भव्य रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है। इस यात्रा के दौरान भक्त भजन गाते हैं और धार्मिक जयघोष करते हैं। सड़कों को फूलों और रंगोली (Rangoli) से सजाया जाता है। इस आयोजन का उद्देश्य समाज में महावीर स्वामी के सिद्धांतों और शांति का संदेश फैलाना है। बहुत से स्थानों पर सजीव झाँकियाँ (Tableaus) भी निकाली जाती हैं जो भगवान के जीवन प्रसंगों को दर्शाती हैं।
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ इस दिन दान-पुण्य (Charity) का भी विशेष महत्व है। जैन समुदाय (Jain Community) द्वारा गरीबों को भोजन, वस्त्र और औषधियाँ वितरित की जाती हैं। बहुत से लोग इस दिन व्रत (Fasting) रखते हैं और मौन साधना करते हैं। मंदिरों में 'महावीर स्वामी की आरती' और प्रवचन आयोजित किए जाते हैं, जहाँ विद्वान मुनिराज भगवान के 'पंचशील सिद्धांतों' (Five Principles) की व्याख्या करते हैं। यह दिन आत्म-निरीक्षण और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का भी अवसर है।
महावीर जयंती (Mahavir Jayanti) के अवसर पर जैन स्कूलों और संस्थानों में निबंध प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम (Cultural Programs) आयोजित किए जाते हैं। इससे युवा पीढ़ी को अपने तीर्थंकरों (Tirthankaras) के इतिहास और दर्शन की जानकारी मिलती है। बहुत से लोग इस दिन जीव रक्षा के लिए संकल्प लेते हैं और कसाईखानों (Abattoirs) को बंद रखने की अपील करते हैं। यह उत्सव केवल खुशियाँ मनाने का नहीं, बल्कि करुणा और दया (Mercy and Kindness) को आचरण में उतारने का दिन है।
शाम के समय मंदिरों और घरों में दीप जलाए जाते हैं और विशेष भक्ति संगीत (Devotional Music) का आयोजन होता है। 'जैन दर्शन' (Jain Philosophy) के अनुसार यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि प्रत्येक आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति है। उत्सव का समापन सामूहिक भोज (Community Feast) के साथ होता है, जहाँ सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। महावीर जयंती का यह पावन पर्व हमें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा (Motivation) देता है और समाज में एकता का संचार करता है।