गुड़ी पड़वा पूजा (Gudi Padwa Puja) की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त (Auspicious Time) में उठकर स्नान करने और नए वस्त्र धारण करने से होती है। पूजा की मुख्य रस्म गुड़ी खड़ी करना है, जिसके लिए घर के प्रवेश द्वार के पास एक ऊँचा और साफ स्थान चुना जाता है। इस स्थान को गोबर या शुद्ध जल से पवित्र (Purify) करके वहाँ सिंदूर और हल्दी से सुंदर चौक या रंगोली (Traditional Floor Art) बनाई जाती है। पूजा के संकल्प (Resolution) के साथ मन को शांत रखना और ईश्वर के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखना इस विधि का सबसे अनिवार्य हिस्सा माना जाता है।
ध्वज यानी गुड़ी की स्थापना (Installation of Flag) करते समय लकड़ी के ऊपरी भाग पर नीम की टहनियाँ और आम के पत्ते बाँधे जाते हैं। इसके साथ ही फूलों की माला और शक्कर के हार (Sugar Garland) चढ़ाकर उस पर तांबे का कलश उल्टा रखा जाता है। कलश पर स्वास्तिक (Holy Sign) बनाना शुभता का संचार करता है। पूजा में धूप, दीप और अगरबत्ती का उपयोग करके आरती की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया परिवार के मुखिया या वरिष्ठ सदस्य के मार्गदर्शन (Guidance) में संपन्न की जानी चाहिए ताकि परंपरा की शुद्धता बनी रहे।
पूजा के दौरान मंत्रोच्चार (Chanting of Hymns) करना वातावरण को भक्तिमय बनाता है। भगवान ब्रह्मा और सूर्य देव (Sun God) का ध्यान करते हुए उन्हें अर्घ्य अर्पित किया जाता है। गुड़ी पड़वा पूजा (Gudi Padwa Puja) में कलश पूजन का विशेष महत्व है, जो ब्रह्मांड की शक्तियों का प्रतीक है। इस समय परिवार के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर सुख-शांति की प्रार्थना (Prayer for Peace) करते हैं। यह सामूहिक पूजा घर के वास्तु दोषों को मिटाकर सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करती है और संबंधों को मज़बूती प्रदान करती है।
धार्मिक नियमों (Religious Rules) के अनुसार, गुड़ी को सूर्योदय के तुरंत बाद फहराना चाहिए और इसे सूर्यास्त से पहले आदरपूर्वक नीचे उतारना चाहिए। नीचे उतारते समय भी पूजा की जाती है और प्रसाद का वितरण (Distribution of Prasad) होता है। पूजा की इस पूरी विधि में स्वच्छता (Cleanliness) का बहुत महत्व है। उपयोग किए गए फूलों और पत्तों को कूड़े में न फेंककर किसी पवित्र जल स्रोत या गमले की मिट्टी में विसर्जित (Immerse) करना चाहिए। यह प्रकृति के प्रति हमारे सम्मान और उत्तरदायित्व को दर्शाता है।
गुड़ी पड़वा पूजा (Gudi Padwa Puja) हमें अनुशासन और कृतज्ञता का पाठ पढ़ाती है। यह केवल एक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह अपनी आत्मा के शुद्धिकरण (Purification of Soul) का एक अवसर है। पूजा के बाद घर के बड़ों का आशीर्वाद लेना और छोटों को प्यार देना हिंदू संस्कारों (Hindu Values) का आधार है। जब हम पूर्ण भक्ति के साथ इस पूजा को संपन्न करते हैं, तो पूरे वर्ष घर में आनंद और समृद्धि (Prosperity and Joy) का वास रहता है। यह विधि हमें आध्यात्मिक रूप से और अधिक सशक्त बनाती है।