रमज़ान का महीना (Month of Ramzan) आत्म-शुद्धि और संयम का समय है, जिसमें सहरी (Sehri) और इफ्तार (Iftar) की रस्में मुख्य आधार हैं। सहरी वह भोजन है जो सूर्योदय से पहले यानी फज्र की अज़ान से पूर्व किया जाता है। पैगंबर साहब ने सहरी (Pre-dawn Meal) में बरकत बताई है क्योंकि यह दिन भर के उपवास के लिए शरीर को आवश्यक ऊर्जा (Energy) प्रदान करती है। आध्यात्मिक रूप से यह समय अल्लाह से दुआ माँगने और तहज्जुद (Late Night Prayer) के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
सहरी के समय (Sehri Time) किया गया भोजन शरीर के मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को संतुलित रखता है, जिससे रोज़ेदार को दिन भर कमज़ोरी महसूस नहीं होती। विज्ञान के अनुसार, सुबह जल्दी उठकर पौष्टिक आहार (Nutritious Diet) लेने से पाचन तंत्र सक्रिय रहता है और रक्त शर्करा (Blood Sugar) का स्तर बना रहता है। इस समय पानी का पर्याप्त सेवन निर्जलीकरण (Dehydration) से बचाता है। सहरी करना न केवल सुन्नत है, बल्कि यह रोज़ेदार के संकल्प (Resolution) को मज़बूत करने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका भी है।
इफ्तार का समय (Iftar Time) वह क्षण है जब सूर्यास्त के बाद रोज़ा खोला जाता है। खजूर (Dates) से रोज़ा इफ्तार करना सुन्नत है, और इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण (Scientific Reason) है। खजूर में प्राकृतिक शर्करा और फाइबर होते हैं जो खाली पेट को तुरंत ऊर्जा देते हैं और पाचन (Digestion) को सुचारू बनाते हैं। इफ्तार के समय परिवार और दोस्तों का साथ बैठकर खाना आपसी प्रेम और सामुदायिक जुड़ाव (Community Bond) को गहरा करता है, जो मानसिक शांति प्रदान करता है।
आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits) की बात करें तो इफ्तार के वक्त की गई दुआ अल्लाह के यहाँ कभी खाली नहीं जाती। पूरा दिन भूख और प्यास सहने के बाद भोजन के प्रति कृतज्ञता (Gratitude) का भाव पैदा होता है। यह प्रक्रिया इंसान को उन गरीबों के दुख का अहसास कराती है जिन्हें मुश्किल से खाना नसीब होता है। इफ्तार (Breaking the Fast) केवल पेट भरने का नाम नहीं है, बल्कि यह सब्र (Patience) और अनुशासन की परीक्षा में सफल होने का उत्सव है।
रमज़ान (Ramzan) के इन तीस दिनों में सहरी और इफ्तार का नियम शरीर को डिटॉक्स (Detoxify) करने में मदद करता है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि रुक-रुक कर उपवास (Intermittent Fasting) करने से पुरानी कोशिकाएं मरती हैं और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। यह महीना इंसान को शारीरिक, मानसिक और रूहानी (Physical, Mental and Spiritual) तौर पर एक बेहतर व्यक्तित्व प्रदान करता है। रोज़ा इफ्तार और सहरी का अनुशासन जीवन में व्यवस्था और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास (Faith in Allah) पैदा करता है।