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रमज़ान को तीन हिस्सों में बाँटा गया है जिन्हें 'अशरा' (Ashra) कहा जाता है—पहला रहमत (Mercy), दूसरा मग़फ़िरत (Forgiveness) और तीसरा जहन्नुम की आग से निजात। रहमत का महीना (Month of Mercy) होने के नाते, पहले दस दिनों में अल्लाह की विशेष कृपा बरसती है। बरकत प्राप्त करने के लिए रोज़ेदार को अधिक से अधिक नमाज़ पढ़नी चाहिए और कुरान की तिलावत (Recitation of Quran) करनी चाहिए। यह समय अपने दिल को नफरत से साफ करने और दूसरों के प्रति दयालु (Kindness) होने का है।

मग़फ़िरत का काल (Period of Forgiveness) बीच के दस दिनों को कहा जाता है, जहाँ बंदा अपने पुराने गुनाहों के लिए अल्लाह से माफी माँगता है। 'अस्तग़फ़ार' (Seeking Forgiveness) की कसरत करने से रूह पर जमे हुए पापों के दाग धुल जाते हैं। रमज़ान की बरकत (Blessing of Ramzan) पाने के लिए केवल भूखा रहना काफी नहीं है, बल्कि अपनी आँखों, कानों और ज़ुबान का भी रोज़ा रखना चाहिए। झूठ न बोलना और किसी की बुराई न करना इस महीने की रूहानी बरकत (Spiritual Blessing) को बढ़ा देता है।

बरकत (Barkat) का एक बड़ा स्रोत गरीबों की मदद और इफ़्तार कराना है। पैगंबर साहब ने फ़रमाया है कि जो किसी रोज़ेदार को इफ़्तार (Iftar) कराता है, उसे भी उतना ही सवाब मिलता है जितना रोज़ा रखने वाले को। अपने रिज़्क में बरकत के लिए दान-पुण्य और ज़कात (Zakat and Charity) का विशेष प्रबंधन करना चाहिए। यह महीना हमें धैर्य (Patience) सिखाता है, और सब्र करने वालों पर अल्लाह अपनी नेमतें और बरकतें बरसाता है। इबादत में तन्मयता ही बरकत की कुंजी है।

रमज़ान में 'लैलतुल क़द्र' (Laylat al-Qadr) की रात को तलाशना बरकत प्राप्त करने का सबसे बड़ा अवसर है। यह रात हज़ारों महीनों की इबादत से श्रेष्ठ मानी जाती है। अंतिम दस दिनों में एतिकाफ़ (Seclusion for Worship) में बैठना और रातों को जागकर अल्लाह को याद करना रूहानी ऊँचाइयों (Spiritual Heights) तक ले जाता है। इस महीने में की गई हर छोटी नेक कर्म (Good Deed) का बदला सत्तर गुना बढ़ाकर दिया जाता है। यही इस महीने की महानता और दिव्यता है।

रमज़ान की बरकत (Blessing of Ramzan) हमारे चरित्र को बदलने में सहायक होती है। यदि हम इस महीने के बाद भी नेक रास्ते पर चलते रहते हैं, तो इसका अर्थ है कि हमें रमज़ान की वास्तविक बरकत प्राप्त हो गई है। यह महीना एक ट्रेनिंग (Training) की तरह है जो हमें साल भर बुराइयों से बचने की हिम्मत देता है। रहमत और मग़फ़िरत (Mercy and Forgiveness) का यह दौर हमारे जीवन में शांति और सुकून लेकर आता है। अल्लाह की याद में डूबे रहना ही बरकत पाने का सर्वोत्तम मार्ग है।

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रमज़ान को तीन हिस्सों में बाँटा गया है जिन्हें 'अशरा' (Ashra) कहा जाता है—पहला रहमत (Mercy), दूसरा मग़फ़िरत (Forgiveness) और तीसरा जहन्नुम की आग से निजात। रहमत का महीना (Month of Mercy) होने के नाते, पहले दस दिनों में अल्लाह की विशेष कृपा बरसती है। बरकत प्राप्त करने के लिए रोज़ेदार को अधिक से अधिक नमाज़ पढ़नी चाहिए और कुरान की तिलावत (Recitation of Quran) करनी चाहिए। यह समय अपने दिल को नफरत से साफ करने और दूसरों के प्रति दयालु (Kindness) होने का है।

मग़फ़िरत का काल (Period of Forgiveness) बीच के दस दिनों को कहा जाता है, जहाँ बंदा अपने पुराने गुनाहों के लिए अल्लाह से माफी माँगता है। 'अस्तग़फ़ार' (Seeking Forgiveness) की कसरत करने से रूह पर जमे हुए पापों के दाग धुल जाते हैं। रमज़ान की बरकत (Blessing of Ramzan) पाने के लिए केवल भूखा रहना काफी नहीं है, बल्कि अपनी आँखों, कानों और ज़ुबान का भी रोज़ा रखना चाहिए। झूठ न बोलना और किसी की बुराई न करना इस महीने की रूहानी बरकत (Spiritual Blessing) को बढ़ा देता है।

बरकत (Barkat) का एक बड़ा स्रोत गरीबों की मदद और इफ़्तार कराना है। पैगंबर साहब ने फ़रमाया है कि जो किसी रोज़ेदार को इफ़्तार (Iftar) कराता है, उसे भी उतना ही सवाब मिलता है जितना रोज़ा रखने वाले को। अपने रिज़्क में बरकत के लिए दान-पुण्य और ज़कात (Zakat and Charity) का विशेष प्रबंधन करना चाहिए। यह महीना हमें धैर्य (Patience) सिखाता है, और सब्र करने वालों पर अल्लाह अपनी नेमतें और बरकतें बरसाता है। इबादत में तन्मयता ही बरकत की कुंजी है।

रमज़ान में 'लैलतुल क़द्र' (Laylat al-Qadr) की रात को तलाशना बरकत प्राप्त करने का सबसे बड़ा अवसर है। यह रात हज़ारों महीनों की इबादत से श्रेष्ठ मानी जाती है। अंतिम दस दिनों में एतिकाफ़ (Seclusion for Worship) में बैठना और रातों को जागकर अल्लाह को याद करना रूहानी ऊँचाइयों (Spiritual Heights) तक ले जाता है। इस महीने में की गई हर छोटी नेक कर्म (Good Deed) का बदला सत्तर गुना बढ़ाकर दिया जाता है। यही इस महीने की महानता और दिव्यता है।

रमज़ान की बरकत (Blessing of Ramzan) हमारे चरित्र को बदलने में सहायक होती है। यदि हम इस महीने के बाद भी नेक रास्ते पर चलते रहते हैं, तो इसका अर्थ है कि हमें रमज़ान की वास्तविक बरकत प्राप्त हो गई है। यह महीना एक ट्रेनिंग (Training) की तरह है जो हमें साल भर बुराइयों से बचने की हिम्मत देता है। रहमत और मग़फ़िरत (Mercy and Forgiveness) का यह दौर हमारे जीवन में शांति और सुकून लेकर आता है। अल्लाह की याद में डूबे रहना ही बरकत पाने का सर्वोत्तम मार्ग है।
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