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रोज़ा रखना (Fasting) केवल भूखा रहना नहीं है, बल्कि यह आत्म-नियंत्रण (Self-control) की एक साधना है। सहरी (Shari) के समय संतुलित आहार लेना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर भोजन (Fibrous Food) जैसे अंडा, ओट्स और फल खाने से दिन भर ऊर्जा बनी रहती है। अधिक तला-भुना या नमकीन खाना खाने से प्यास ज़्यादा लगती है, इसलिए सादा और पौष्टिक भोजन (Nutritious Food) ही चुनना चाहिए। धर्म के अनुसार सहरी में देरी करना और इफ़्तार में जल्दी करना सुन्नत (Sunnah) है।

रोज़ा खोलने (Breaking the Fast) यानी इफ़्तार के समय एक साथ बहुत सारा खाना खाने से बचना चाहिए। पानी का घूँट और खजूर से शुरुआत करना पेट के लिए आरामदायक (Comfortable for Stomach) होता है। खजूर शरीर को तुरंत ग्लूकोज प्रदान करता है जो दिन भर की थकान मिटाता है। इफ़्तार (Iftar) के समय ताज़े फलों के रस और लस्सी का सेवन शरीर को हाइड्रेटेड (Hydrated) रखता है। धार्मिक रूप से इफ़्तार के समय दुआ माँगना इबादत का एक हिस्सा है, जिसे पूरी एकाग्रता के साथ करना चाहिए।

रोज़े के दौरान (During Fasting) क्रोध और अपशब्दों से बचना उतना ही ज़रूरी है जितना खाने-पीने से बचना। यदि कोई आपसे लड़ना चाहे, तो यह कहना कि "मैं रोज़े से हूँ", धैर्य (Patience) का सबसे बड़ा प्रमाण है। दोपहर के समय अपनी ऊर्जा बचाने के लिए अनावश्यक भागदौड़ (Unnecessary Running) से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से रोज़ा रखने का उद्देश्य 'तक़वा' (Piety) यानी अल्लाह का डर और उसकी मुहब्बत पैदा करना है। यह मन की शांति और रूहानी सुकून (Spiritual Peace) का स्रोत है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से (From Health Perspective), इफ़्तार और सहरी के बीच पर्याप्त पानी पीना चाहिए ताकि निर्जलीकरण (Dehydration) न हो। रात के समय हल्की कसरत या पैदल चलना पाचन में सहायक होता है। बहुत अधिक कैफीन या चाय-कॉफी का सेवन नींद में खलल डाल सकता है, इसलिए इनका सीमित उपयोग करें। रोज़ा (Fast) रखना शरीर को डिटॉक्सिफाई (Detoxify) करने और वजन नियंत्रित करने का एक प्राकृतिक तरीका भी है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान (Boon) के समान है।

रमज़ान (Ramzan) के इन तीस दिनों में अनुशासन और संयम का जो पाठ पढ़ाया जाता है, वह पूरे वर्ष काम आता है। रोज़ा खोलना (Iftar) परिवार के साथ मिल-जुलकर करना सामाजिक रिश्तों को मज़बूत करता है। इफ़्तार के दस्तरख्वान पर अलग-अलग तरह के व्यंजन (Dishes) अल्लाह की दी हुई विविध नेमतों की याद दिलाते हैं। पूरी ईमानदारी और सुन्नत के साथ रोज़ा रखना और खोलना ही इबादत की रूह है। यह हमें एक अनुशासित और नेक इंसान (Righteous Human) बनने में मदद करता है।

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रोज़ा रखना (Fasting) केवल भूखा रहना नहीं है, बल्कि यह आत्म-नियंत्रण (Self-control) की एक साधना है। सहरी (Shari) के समय संतुलित आहार लेना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर भोजन (Fibrous Food) जैसे अंडा, ओट्स और फल खाने से दिन भर ऊर्जा बनी रहती है। अधिक तला-भुना या नमकीन खाना खाने से प्यास ज़्यादा लगती है, इसलिए सादा और पौष्टिक भोजन (Nutritious Food) ही चुनना चाहिए। धर्म के अनुसार सहरी में देरी करना और इफ़्तार में जल्दी करना सुन्नत (Sunnah) है।

रोज़ा खोलने (Breaking the Fast) यानी इफ़्तार के समय एक साथ बहुत सारा खाना खाने से बचना चाहिए। पानी का घूँट और खजूर से शुरुआत करना पेट के लिए आरामदायक (Comfortable for Stomach) होता है। खजूर शरीर को तुरंत ग्लूकोज प्रदान करता है जो दिन भर की थकान मिटाता है। इफ़्तार (Iftar) के समय ताज़े फलों के रस और लस्सी का सेवन शरीर को हाइड्रेटेड (Hydrated) रखता है। धार्मिक रूप से इफ़्तार के समय दुआ माँगना इबादत का एक हिस्सा है, जिसे पूरी एकाग्रता के साथ करना चाहिए।

रोज़े के दौरान (During Fasting) क्रोध और अपशब्दों से बचना उतना ही ज़रूरी है जितना खाने-पीने से बचना। यदि कोई आपसे लड़ना चाहे, तो यह कहना कि "मैं रोज़े से हूँ", धैर्य (Patience) का सबसे बड़ा प्रमाण है। दोपहर के समय अपनी ऊर्जा बचाने के लिए अनावश्यक भागदौड़ (Unnecessary Running) से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से रोज़ा रखने का उद्देश्य 'तक़वा' (Piety) यानी अल्लाह का डर और उसकी मुहब्बत पैदा करना है। यह मन की शांति और रूहानी सुकून (Spiritual Peace) का स्रोत है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से (From Health Perspective), इफ़्तार और सहरी के बीच पर्याप्त पानी पीना चाहिए ताकि निर्जलीकरण (Dehydration) न हो। रात के समय हल्की कसरत या पैदल चलना पाचन में सहायक होता है। बहुत अधिक कैफीन या चाय-कॉफी का सेवन नींद में खलल डाल सकता है, इसलिए इनका सीमित उपयोग करें। रोज़ा (Fast) रखना शरीर को डिटॉक्सिफाई (Detoxify) करने और वजन नियंत्रित करने का एक प्राकृतिक तरीका भी है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान (Boon) के समान है।

रमज़ान (Ramzan) के इन तीस दिनों में अनुशासन और संयम का जो पाठ पढ़ाया जाता है, वह पूरे वर्ष काम आता है। रोज़ा खोलना (Iftar) परिवार के साथ मिल-जुलकर करना सामाजिक रिश्तों को मज़बूत करता है। इफ़्तार के दस्तरख्वान पर अलग-अलग तरह के व्यंजन (Dishes) अल्लाह की दी हुई विविध नेमतों की याद दिलाते हैं। पूरी ईमानदारी और सुन्नत के साथ रोज़ा रखना और खोलना ही इबादत की रूह है। यह हमें एक अनुशासित और नेक इंसान (Righteous Human) बनने में मदद करता है।
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