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मौनडी थर्सडे की शाम को आयोजित होने वाली चर्च इवनिंग मास (Evening Mass) को 'प्रभु के अंतिम भोज की याद' (Mass of the Lord's Supper) के रूप में मनाया जाता है। यह प्रार्थना सभा अत्यंत गंभीर और भक्तिमय (Devotional and Solemn) होती है क्योंकि यह पवित्र त्रय (Holy Triduum) के तीन दिनों की शुरुआत करती है। इस मास के दौरान 'महिमा गीत' (Gloria) गाते समय गिरजाघर की सभी घंटियाँ बजाई जाती हैं, जिसके बाद वे ईस्टर की रात तक शांत (Silent) रहती हैं। यह खामोशी प्रभु के आगामी दुखभोग और शोक को दर्शाती है।

इस विशेष प्रार्थना (Church Evening Mass) का एक मुख्य आकर्षण 'पैर धोने की रस्म' है, जहाँ मुख्य याजक कलीसिया के सदस्यों के पैर धोते हैं। इसके बाद पवित्र यूखरिस्त (Holy Eucharist) का संस्कार बड़े ही आदर के साथ संपन्न किया जाता है। शाम की इस सेवा (Evening Service) में दिया जाने वाला प्रवचन प्रेम, सेवा और बलिदान (Love, Service and Sacrifice) के विषयों पर केंद्रित होता है। वातावरण पूरी तरह से रूहानी होता है, जहाँ मोमबत्तियों की रोशनी और अगरबत्ती की खुशबू भक्तों को एक दिव्य अनुभव (Divine Experience) प्रदान करती है।

प्रार्थना (Prayer) के अंत में एक विशेष प्रक्रिया होती है जिसे 'पवित्र परमप्रसाद का जुलूस' (Procession of the Blessed Sacrament) कहा जाता है। इसमें प्रभु की उपस्थिति को मुख्य वेदी से हटाकर एक अलग सुसज्जित स्थान (Altar of Repose) पर ले जाया जाता है। इसके बाद चर्च की मुख्य वेदी को पूरी तरह खाली (Stripping of the Altar) कर दिया जाता है, जो यीशु के अपमान और उनके शिष्यों द्वारा उन्हें छोड़े जाने का प्रतीक है। यह दृश्य भक्तों के दिलों में एक गहरी संवेदना (Deep Compassion) और विलाप पैदा करता है।

इवनिंग मास (Evening Mass) के समापन पर कोई औपचारिक विदाई या आशीर्वाद नहीं दिया जाता, क्योंकि यह प्रार्थना गुड फ्राइडे और ईस्टर तक एक निरंतर प्रक्रिया (Continuous Process) मानी जाती है। भक्त इस सेवा के बाद घंटों तक चर्च में बैठकर 'जागरण' (Watching) करते हैं, जो गेथसेमेन के बाग में यीशु के साथ जागने की याद दिलाता है। यह समय गहन आत्म-चिंतन और व्यक्तिगत प्रार्थना (Personal Prayer) का होता है। रात का सन्नाटा और चर्च का बदला हुआ रूप विश्वासियों को प्रभु के कष्टों की गहराई से परिचित कराता है।

भारत में इस शाम की सेवा (Maundy Thursday Evening Mass) में भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं और अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। यह सभा हमें सिखाती है कि हम एक ऐसे ईश्वर की संतान हैं जिसने स्वयं को हमारे लिए एक भोजन के रूप में दे दिया। शाम का यह मिलन (Gathering) आपसी मतभेदों को भुलाकर प्रेम में एक होने का अवसर है। यह प्रार्थना हमें याद दिलाती है कि अंधेरी रात के बाद ही पुनरुत्थान की सुबह (Morning of Resurrection) आएगी। चर्च की यह शाम हर विश्वासी के लिए एक आत्मिक पुनर्जागरण (Spiritual Awakening) का समय है।

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मौनडी थर्सडे की शाम को आयोजित होने वाली चर्च इवनिंग मास (Evening Mass) को 'प्रभु के अंतिम भोज की याद' (Mass of the Lord's Supper) के रूप में मनाया जाता है। यह प्रार्थना सभा अत्यंत गंभीर और भक्तिमय (Devotional and Solemn) होती है क्योंकि यह पवित्र त्रय (Holy Triduum) के तीन दिनों की शुरुआत करती है। इस मास के दौरान 'महिमा गीत' (Gloria) गाते समय गिरजाघर की सभी घंटियाँ बजाई जाती हैं, जिसके बाद वे ईस्टर की रात तक शांत (Silent) रहती हैं। यह खामोशी प्रभु के आगामी दुखभोग और शोक को दर्शाती है।

इस विशेष प्रार्थना (Church Evening Mass) का एक मुख्य आकर्षण 'पैर धोने की रस्म' है, जहाँ मुख्य याजक कलीसिया के सदस्यों के पैर धोते हैं। इसके बाद पवित्र यूखरिस्त (Holy Eucharist) का संस्कार बड़े ही आदर के साथ संपन्न किया जाता है। शाम की इस सेवा (Evening Service) में दिया जाने वाला प्रवचन प्रेम, सेवा और बलिदान (Love, Service and Sacrifice) के विषयों पर केंद्रित होता है। वातावरण पूरी तरह से रूहानी होता है, जहाँ मोमबत्तियों की रोशनी और अगरबत्ती की खुशबू भक्तों को एक दिव्य अनुभव (Divine Experience) प्रदान करती है।

प्रार्थना (Prayer) के अंत में एक विशेष प्रक्रिया होती है जिसे 'पवित्र परमप्रसाद का जुलूस' (Procession of the Blessed Sacrament) कहा जाता है। इसमें प्रभु की उपस्थिति को मुख्य वेदी से हटाकर एक अलग सुसज्जित स्थान (Altar of Repose) पर ले जाया जाता है। इसके बाद चर्च की मुख्य वेदी को पूरी तरह खाली (Stripping of the Altar) कर दिया जाता है, जो यीशु के अपमान और उनके शिष्यों द्वारा उन्हें छोड़े जाने का प्रतीक है। यह दृश्य भक्तों के दिलों में एक गहरी संवेदना (Deep Compassion) और विलाप पैदा करता है।

इवनिंग मास (Evening Mass) के समापन पर कोई औपचारिक विदाई या आशीर्वाद नहीं दिया जाता, क्योंकि यह प्रार्थना गुड फ्राइडे और ईस्टर तक एक निरंतर प्रक्रिया (Continuous Process) मानी जाती है। भक्त इस सेवा के बाद घंटों तक चर्च में बैठकर 'जागरण' (Watching) करते हैं, जो गेथसेमेन के बाग में यीशु के साथ जागने की याद दिलाता है। यह समय गहन आत्म-चिंतन और व्यक्तिगत प्रार्थना (Personal Prayer) का होता है। रात का सन्नाटा और चर्च का बदला हुआ रूप विश्वासियों को प्रभु के कष्टों की गहराई से परिचित कराता है।

भारत में इस शाम की सेवा (Maundy Thursday Evening Mass) में भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं और अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। यह सभा हमें सिखाती है कि हम एक ऐसे ईश्वर की संतान हैं जिसने स्वयं को हमारे लिए एक भोजन के रूप में दे दिया। शाम का यह मिलन (Gathering) आपसी मतभेदों को भुलाकर प्रेम में एक होने का अवसर है। यह प्रार्थना हमें याद दिलाती है कि अंधेरी रात के बाद ही पुनरुत्थान की सुबह (Morning of Resurrection) आएगी। चर्च की यह शाम हर विश्वासी के लिए एक आत्मिक पुनर्जागरण (Spiritual Awakening) का समय है।
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