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रमज़ान का महीना (Ramzan Mahina) और कुरान का रिश्ता बहुत अटूट है, क्योंकि इसी महीने में अल्लाह ने इंसानियत के मार्गदर्शन (Guidance for Humanity) के लिए अपनी पाक किताब उतारी थी। इस महीने में कुरान पढ़ना और सुनना (Recitation and Listening) रूहानी गिज़ा के समान है। बहुत से मुसलमान इस महीने में कम से कम एक बार मुकम्मल कुरान (Complete Quran) खतम करने की कोशिश करते हैं। वचनों की तिलावत (Tilawat) घर में बरकत लाती है और शैतानी वसवसों से हिफाज़त (Protection from Evil) करती है।

रमज़ान के आखिरी अशरे (Last Ten Days) की विषम रातों में शब-ए-कद्र (Night of Power) छिपी होती है, जो हज़ारों महीनों की इबादत से अफजल (Superior) है। इस रात में इबादत करना इंसान के पिछले तमाम गुनाहों की माफ़ी (Forgiveness of All Past Sins) का सबब बनता है। कुरान में इस रात की महिमा को विस्तार से बताया गया है, जहाँ फरिश्ते ज़मीन पर उतरते हैं और बंदों की दुआओं पर 'आमीन' कहते हैं। यह रात (Laylat al-Qadr) एक मोमिन के लिए रूहानी तरक्की का सबसे बड़ा मौका है।

कुरान ख्वानी (Quran Recitation) का असल मकसद केवल लफ़्ज़ों को पढ़ना नहीं, बल्कि उसके संदेशों (Messages) को समझना और अपनी ज़िंदगी में लागू करना है। रमज़ान का अनुशासन (Discipline) हमें वक्त निकालकर कुरान के तर्जुमे (Translation) को पढ़ने का मौका देता है। जो व्यक्ति कुरान के साथ अपना वक्त गुज़ारता है, उसके दिल में नूर (Light) पैदा होता है और उसे सही और गलत की पहचान होती है। यह मुकद्दस किताब (Holy Book) इंसान के लिए दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी की कुंजी है।

शब-ए-कद्र (Shab-e-Qadr) की तलाश में एतिकाफ (Itikaf) बैठने की सुन्नत भी बहुत महत्वपूर्ण है, जहाँ बंदा दुनिया से कटकर सिर्फ अपने खालिक (Creator) की याद में मस्जिद के कोने में बैठता है। इस दौरान कुरान की तिलावत और गिड़गिड़ाकर की गई दुआएं (Crying Supplications) अल्लाह को बहुत पसंद हैं। यह रात (Mystical Night) तकदीर बदलने वाली रात मानी जाती है। जो इस रात की बरकतों से महरूम रहा, वह समझो सब कुछ से महरूम रहा। यह इबादत की इंतहा और रूहानी सुकून (Spiritual Contentment) का शिखर है।

रमज़ान (Ramzan Month) और कुरान का यह संगम हमें एक मुकम्मल इंसान बनाने की दिशा में ले जाता है। कुरान की आयतें (Verses) हमारे अंधेरे रास्तों में मशाल की तरह काम करती हैं। शब-ए-कद्र (Night of Power) का इंतज़ार हमें सब्र और लगन सिखाता है। रमज़ान के खत्म होने पर जब हम कुरान के साथ एक गहरा रिश्ता बना लेते हैं, तो हमारा जीवन अनुशासित (Disciplined) हो जाता है। यह रूहानी विरासत (Spiritual Heritage) हमें हमेशा नेक कामों की ओर प्रेरित करती रहती है।

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रमज़ान का महीना (Ramzan Mahina) और कुरान का रिश्ता बहुत अटूट है, क्योंकि इसी महीने में अल्लाह ने इंसानियत के मार्गदर्शन (Guidance for Humanity) के लिए अपनी पाक किताब उतारी थी। इस महीने में कुरान पढ़ना और सुनना (Recitation and Listening) रूहानी गिज़ा के समान है। बहुत से मुसलमान इस महीने में कम से कम एक बार मुकम्मल कुरान (Complete Quran) खतम करने की कोशिश करते हैं। वचनों की तिलावत (Tilawat) घर में बरकत लाती है और शैतानी वसवसों से हिफाज़त (Protection from Evil) करती है।

रमज़ान के आखिरी अशरे (Last Ten Days) की विषम रातों में शब-ए-कद्र (Night of Power) छिपी होती है, जो हज़ारों महीनों की इबादत से अफजल (Superior) है। इस रात में इबादत करना इंसान के पिछले तमाम गुनाहों की माफ़ी (Forgiveness of All Past Sins) का सबब बनता है। कुरान में इस रात की महिमा को विस्तार से बताया गया है, जहाँ फरिश्ते ज़मीन पर उतरते हैं और बंदों की दुआओं पर 'आमीन' कहते हैं। यह रात (Laylat al-Qadr) एक मोमिन के लिए रूहानी तरक्की का सबसे बड़ा मौका है।

कुरान ख्वानी (Quran Recitation) का असल मकसद केवल लफ़्ज़ों को पढ़ना नहीं, बल्कि उसके संदेशों (Messages) को समझना और अपनी ज़िंदगी में लागू करना है। रमज़ान का अनुशासन (Discipline) हमें वक्त निकालकर कुरान के तर्जुमे (Translation) को पढ़ने का मौका देता है। जो व्यक्ति कुरान के साथ अपना वक्त गुज़ारता है, उसके दिल में नूर (Light) पैदा होता है और उसे सही और गलत की पहचान होती है। यह मुकद्दस किताब (Holy Book) इंसान के लिए दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी की कुंजी है।

शब-ए-कद्र (Shab-e-Qadr) की तलाश में एतिकाफ (Itikaf) बैठने की सुन्नत भी बहुत महत्वपूर्ण है, जहाँ बंदा दुनिया से कटकर सिर्फ अपने खालिक (Creator) की याद में मस्जिद के कोने में बैठता है। इस दौरान कुरान की तिलावत और गिड़गिड़ाकर की गई दुआएं (Crying Supplications) अल्लाह को बहुत पसंद हैं। यह रात (Mystical Night) तकदीर बदलने वाली रात मानी जाती है। जो इस रात की बरकतों से महरूम रहा, वह समझो सब कुछ से महरूम रहा। यह इबादत की इंतहा और रूहानी सुकून (Spiritual Contentment) का शिखर है।

रमज़ान (Ramzan Month) और कुरान का यह संगम हमें एक मुकम्मल इंसान बनाने की दिशा में ले जाता है। कुरान की आयतें (Verses) हमारे अंधेरे रास्तों में मशाल की तरह काम करती हैं। शब-ए-कद्र (Night of Power) का इंतज़ार हमें सब्र और लगन सिखाता है। रमज़ान के खत्म होने पर जब हम कुरान के साथ एक गहरा रिश्ता बना लेते हैं, तो हमारा जीवन अनुशासित (Disciplined) हो जाता है। यह रूहानी विरासत (Spiritual Heritage) हमें हमेशा नेक कामों की ओर प्रेरित करती रहती है।
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