रमज़ान का दूसरा हिस्सा यानी 11वें दिन से 20वें दिन तक का समय मगफिरत का महीना (Month of Forgiveness) कहलाता है। यह वह विशेष कालखंड है जहाँ अल्लाह अपने गुनाहगार बंदों की सच्ची तौबा (Repentance) स्वीकार करता है और उनके पापों को क्षमा (Forgiveness) कर देता है। मगफिरत (Maghfirat) का अर्थ है गुनाहों की गंदगी से रूह को पूरी तरह पाक कर देना। इस दौरान की गई इबादत (Worship) इंसान के पिछले तमाम बुरे कर्मों को मिटाने की सामर्थ्य रखती है, बशर्ते वह सच्चे दिल से लज्जित (Remorseful) हो।
तौबा (Repentance) की अहमियत इस मगफिरत के महीने (Maghfirat ka Mahina) में इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि यह इंसान को एक नई रूहानी ज़िंदगी (New Spiritual Life) जीने का मौका देता है। बहुत से लोग अपनी पिछली गलतियों के कारण निराशा (Despair) में घिरे रहते हैं, लेकिन मगफिरत (Forgiveness) का यह संदेश उन्हें आशा की नई किरण दिखाता है। इन दस दिनों में रात की तन्हाई में रो-रोकर की गई दुआएं (Crying Prayers) सीधे खुदा के अर्श तक पहुँचती हैं। मगफिरत (Maghfirat) हासिल करना ही एक मोमिन की सबसे बड़ी कामयाबी है।
मगफिरत का महीना (Month of Forgiveness) हमें यह भी सिखाता है कि यदि हम खुदा से माफ़ी (Forgiveness) चाहते हैं, तो हमें भी अपने साथी मनुष्यों को माफ़ करना सीखना होगा। आपसी रंजिशों और नफरत (Hatred and Grudges) को भुलाकर मेल-मिलाप करना इस अशरे की रूह है। जब हम किसी की गलती को दरगुज़र (Overlook) करते हैं, तो हम वास्तव में मगफिरत (Maghfirat) के हकदार बनते हैं। यह व्यवहार हमारे सामाजिक रिश्तों में मधुरता (Sweetness in Relationships) और समाज में स्थिरता लाता है। यह आत्म-सुधार (Self-improvement) का सबसे कठिन लेकिन फलदायी चरण है।
इबादत के दौरान मगफिरत की दुआ (Prayer for Forgiveness) बार-बार दोहराना ज़बान और दिल को पवित्र बनाता है। मगफिरत का महीना (Maghfirat ka Mahina) हमें सचेत करता है कि जीवन नश्वर है और हमें अपने कृत्यों का हिसाब देना है। यह डर हमें भविष्य में पापों (Sins) से बचने और नेक राह पर चलने की ताकत देता है। मगफिरत (Forgiveness) का मतलब केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि दोबारा वैसी गलती न करने का दृढ़ संकल्प (Firm Resolution) है। यह रूहानी अनुशासन (Spiritual Discipline) हमारे ईमान को मज़बूत करता है।
अंततः मगफिरत का महीना (Month of Forgiveness) हमें जहन्नम की आग से बचाने और जन्नत (Paradise) की राह आसान करने का माध्यम है। जो व्यक्ति इन दस दिनों की कद्र करता है और इबादत (Worship) में लीन रहता है, वह एक भारहीन और पवित्र महसूस करता है। मगफिरत (Maghfirat) का अहसास इंसान को आत्म-ग्लानि से मुक्त कर रूहानी खुशी (Spiritual Joy) प्रदान करता है। यह समय खुदा की असीम दया और उसकी माफ़ करने वाली सिफत (Attribute of Forgiveness) का जश्न मनाने का है। यह पाकीज़ा महीना हमें ईश्वर के और करीब ले आता है।