गुड़ी स्थापना (Gudhi Sthapana) मुख्य रूप से सूर्योदय के तुरंत बाद की जाती है क्योंकि इसे ब्रह्मांड की नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर परिवार के सभी सदस्य स्नान करके शुद्ध होते हैं और घर के सामने वाले हिस्से को साफ करके वहाँ सुंदर रंगोली (Rangoli) बनाते हैं। स्थापना के लिए एक लंबी लकड़ी (Wooden Stick) का चुनाव किया जाता है जिसे गंगाजल से पवित्र (Purified with Holy Water) किया जाता है। यह प्रक्रिया (Process) घर में सुख-शांति और समृद्धि (Prosperity and Peace) को आमंत्रित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
स्थापना के दौरान लकड़ी के ऊपरी सिरे पर एक नया और चमकीला रेशमी वस्त्र (Reshmi Vastra) बांधा जाता है जिसे अक्सर जरी के काम से सजाया जाता है। इसके ऊपर तांबे या पीतल का लोटा (Copper or Brass Pot) उल्टा करके रखा जाता है, जिसे 'कलश' (Kalash) भी कहते हैं। गुड़ी स्थापना (Gudhi Sthapana) की यह रचना (Structure) आकाश की ओर इंगित करती है, जो प्रगति और उच्च लक्ष्यों (High Goals and Progress) की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है। इसे हल्दी-कुंकुम (Turmeric and Vermilion) लगाकर सम्मानित किया जाता है।
पूजा की मुख्य रस्म (Main Ritual of Worship) में गुड़ी को फूलों की माला, शक्कर की गांठें (Sugar Candy Garland) और नीम की कोमल पत्तियों से सजाया जाता है। अगरबत्ती और दीपक (Incense and Lamp) जलाकर इसकी आरती की जाती है और आने वाले वर्ष के लिए मंगल कामना की जाती है। गुड़ी स्थापना (Gudhi Sthapana) के वक्त भक्त अपनी कुल परंपराओं (Ancestral Traditions) का पालन करते हुए मंत्रोच्चार (Chanting) करते हैं। यह रस्म परिवार के भीतर भक्ति और अनुशासन (Devotion and Discipline) का वातावरण निर्मित करती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुड़ी स्थापना (Gudhi Sthapana) को विजय ध्वज (Flag of Victory) के रूप में देखा जाता है जो नकारात्मक शक्तियों को घर से दूर रखता है। इसे घर की खिड़की या बालकनी में ऐसी जगह लगाया जाता है जहाँ से सूर्य की पहली किरणें (First Rays of Sun) इस पर पड़ें। यह व्यवस्था (Arrangement) सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) के प्रवाह को बढ़ाती है। स्थापना के बाद पूरे दिन इसे फहराते रहना गौरव और स्वाभिमान (Pride and Self-respect) का प्रतीक माना जाता है।
सूर्यास्त से पहले गुड़ी को सम्मानपूर्वक उतारने की भी एक निश्चित विधि (Method) होती है। उतारने के बाद कलश और वस्त्र (Pot and Cloth) को संभाल कर रख लिया जाता है और प्रसाद का वितरण (Distribution of Prasad) किया जाता है। गुड़ी स्थापना (Gudhi Sthapana) हमें समय के महत्व और प्राकृतिक बदलावों के साथ चलने की शिक्षा देती है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की गहराई और रूहानी विरासत (Spiritual Heritage) को सहेजने का एक सुंदर माध्यम है।