ईस्टर संडे (Easter Sunday) की शुरुआत बहुत ही तड़के सुबह होती है, जिसे 'सनराइज सर्विस' (Sunrise Service) कहा जाता है। भक्त अंधेरा रहते ही चर्च में एकत्रित होने लगते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि यीशु मसीह भोर के समय ही जीवित हुए थे। चर्च को सफेद फूलों (White Flowers) और मोमबत्तियों से खूबसूरती से सजाया जाता है। सफेद रंग पवित्रता (Purity) और विजय का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रार्थना सभा के दौरान पादरी (Pastor) जी उठने का शुभ संदेश (Gospel Message) पढ़ते हैं। चर्च का माहौल बहुत ही भक्तिपूर्ण और ऊर्जा से भरा होता है। लोग सफेद या नए कपड़े पहनकर आते हैं, जो एक नई शुरुआत और शुद्धिकरण (Purification) को दर्शाते हैं। इस दिन चर्च की घंटियाँ जोर-शोर से बजाई जाती हैं, जो खुशी और विजय की घोषणा करती हैं।
विशेष उपदेश (Sermon) में आशा (Hope) और मृत्यु पर जीवन की जीत के बारे में बताया जाता है। यह संदेश उन लोगों के लिए बहुत प्रेरणादायक होता है जो अपने जीवन में संघर्ष कर रहे हैं। प्रार्थना सभा में सामूहिक गायन और क्वायर (Choir) का प्रदर्शन माहौल को और भी दिव्य बना देता है। सभी विश्वासी एक स्वर में ईश्वर की महिमा का गुणगान करते हैं।
चर्च की सेवा में पश्चाताप की भावना के बजाय आनंद (Joy) का अनुभव अधिक होता है। चालीस दिनों के दुखभोग और उपवास (Lent) के बाद यह दिन उत्सव का होता है। प्रार्थना के अंत में शांति का अभिवादन (Greeting of Peace) किया जाता है, जहाँ लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर प्रेम का संदेश देते हैं। यह क्षण सामुदायिक सद्भाव (Communal Harmony) का एक बेहतरीन उदाहरण है।
कई चर्चों में इस दिन नए सदस्यों का बपतिस्मा (Baptism) भी किया जाता है, जो उनके नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत होती है। चर्च से निकलते समय लोगों के चेहरों पर एक नई चमक और विश्वास होता है। यह सेवा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान (Religious Ritual) नहीं है, बल्कि यह आत्मा को झकझोर देने वाला एक आध्यात्मिक अनुभव (Spiritual Experience) है।