ईस्टर रविवार का भोजन (Easter Sunday Meal) चालीसा काल (Lent Season) के चालीस दिनों के उपवास और परहेज के समापन का प्रतीक होता है। इस खास दिन पर परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर एक भव्य दावत (Grand Feast) का आनंद लेते हैं। पारंपरिक रूप से इस भोजन में मांस के व्यंजन (Meat Dishes), विशेष रूप से मेमने का मांस (Lamb Meat) शामिल किया जाता है, जो प्रभु यीशु को 'परमेश्वर का मेमना' (Lamb of God) मानने की धार्मिक परंपरा से जुड़ा है। इसके अलावा ताजी सब्जियां और मौसमी फल भी थाली की शोभा बढ़ाते हैं।
मीठे व्यंजनों में 'हॉट क्रॉस बन्स' (Hot Cross Buns) का विशेष स्थान है, जिन पर मसालों और किशमिश का उपयोग किया जाता है। इन बन्स (Buns) के ऊपर बना क्रूस (Cross) का निशान प्रभु के बलिदान की याद दिलाता है। कई घरों में ईस्टर केक (Easter Cake) भी काटा जाता है जिसे मेवे और चेरी से सजाया जाता है। यह मीठा भोजन (Sweet Food) दुःख के समय के अंत और जीवन की नई मिठास और खुशियों के आगमन को दर्शाता है।
भारतीय मसीही परिवारों (Indian Christian Families) में क्षेत्रीय स्वाद का भी गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। दक्षिण भारत में अप्पम और मटन स्टू (Mutton Stew) ईस्टर रविवार के भोजन (Easter Sunday Meal) का मुख्य हिस्सा होते हैं, जबकि उत्तर भारत में बिरयानी और कबाब (Kebabs) चाव से खाए जाते हैं। भोजन की तैयारी में शुद्ध मसालों (Pure Spices) और घी का उपयोग किया जाता है ताकि यह दावत यादगार बन सके। यह भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि आपसी प्रेम (Mutual Love) को बढ़ाने का माध्यम है।
भोजन शुरू करने से पहले परिवार के मुखिया द्वारा एक विशेष 'भोजन की प्रार्थना' (Grace Before Meals) कही जाती है। इसमें ईश्वर को दिए गए भोजन और जीवन के लिए धन्यवाद (Thanksgiving) दिया जाता है। मेज पर सजे रंगीन अंडे (Colored Eggs) नए जीवन की प्रचुरता को प्रदर्शित करते हैं। छोटे बच्चों को चॉकलेट के अंडे (Chocolate Eggs) दिए जाते हैं, जिससे उनके मन में इस पवित्र दिन के प्रति उत्साह बना रहता है। यह सामूहिक भोजन (Community Meal) पारिवारिक एकता को और अधिक मजबूत करता है।
ईस्टर का यह विशेष खाना (Special Food) खिलाने के लिए अक्सर मेहमानों और पड़ोसियों को भी आमंत्रित किया जाता है। भोजन के दौरान प्रभु यीशु के पुनरुत्थान (Resurrection) की चर्चा की जाती है और खुशियाँ साझा की जाती हैं। बचे हुए भोजन को गरीबों और जरूरतमंदों (Needy People) में बांटना भी एक नेक परंपरा मानी जाती है। यह दिन हमें सिखाता है कि ईश्वर की आशीषों (Blessings) का आनंद अकेले नहीं, बल्कि पूरे समाज के साथ मिलकर लेना चाहिए।