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ईस्टर ईसाई कैलेंडर की सबसे महत्वपूर्ण घटना (Most Important Christian Calendar Event) है जिसके इर्द-गिर्द अन्य सभी त्योहारों की तिथियां निर्धारित होती हैं। इसकी गणना चंद्रमा की स्थिति (Position of Moon) के आधार पर की जाती है। ईस्टर हमेशा वसंत विषुव (Vernal Equinox) के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के बाद के रविवार को पड़ता है। यही कारण है कि ईस्टर की तारीख हर साल बदलती रहती है, जो इसे एक 'चलायमान पर्व' (Movable Feast) बनाती है।

मसीही कैलेंडर (Christian Calendar) में ईस्टर का स्थान एक केंद्रीय धुरी की तरह है। इससे पहले चालीस दिनों का 'चालीसा काल' (Lent) आता है जो पश्चाताप और उपवास का समय होता है। ईस्टर के बाद 'ईस्टर का समय' (Eastertide) शुरू होता है जो पचास दिनों तक चलता है और 'पेंतेकुस्त' (Pentecost) के साथ समाप्त होता है। चर्च के वार्षिक चक्र (Annual Cycle) में यह समय सबसे अधिक उत्सव और खुशी का माना जाता है, जहाँ मृत्यु पर जीवन की जीत का जश्न मनाया जाता है।

ईसाई पंचांग (Christian Almanac) के अनुसार, ईस्टर केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक पूरी आध्यात्मिक यात्रा का शिखर है। 'होली वीक' (Holy Week) या पवित्र सप्ताह के दौरान खजूर रविवार (Palm Sunday), पवित्र गुरुवार और गुड फ्राइडे जैसी महत्वपूर्ण घटनाएं घटती हैं जो ईस्टर रविवार की सुबह में पूर्ण होती हैं। यह क्रमबद्ध घटनाचक्र (Sequence of Events) विश्वासियों को यीशु के दुःखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान के रहस्य (Mystery of Resurrection) को गहराई से समझने में मदद करता है।

इतिहास की दृष्टि से देखें तो ईस्टर (Easter) की तिथि को लेकर प्रारंभिक चर्च में कई विवाद हुए थे, जिन्हें बाद में 'नीसिया की परिषद' (Council of Nicaea) में सुलझाया गया। इस ऐतिहासिक निर्णय ने पूरी दुनिया के ईसाइयों को एक ही दिन ईस्टर मनाने के लिए एकजुट किया। यह एकता (Unity) ईसाई जगत की एक बड़ी विशेषता है। कैलेंडर की यह व्यवस्था प्रकृति के चक्र (Cycle of Nature) के साथ भी जुड़ी हुई है, जो जाड़े के बाद नई हरियाली और जीवन के आने का संकेत देती है।

ईस्टर के बिना मसीही कैलेंडर (Christian Calendar) अधूरा है क्योंकि यह प्रभु के वादों के पूरा होने का दिन है। यह घटना हमें समय की पवित्रता (Sanctity of Time) का बोध कराती है। हर साल जब यह त्योहार आता है, तो यह विश्वासियों को अपने आध्यात्मिक जीवन का नवीनीकरण (Spiritual Renewal) करने का अवसर देता है। कैलेंडर की यह प्रमुख घटना (Key Event) हमें याद दिलाती है कि समय का पहिया चाहे कितना भी घूमे, ईश्वर का प्रेम और सत्य सदैव अटल रहता है।

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ईस्टर ईसाई कैलेंडर की सबसे महत्वपूर्ण घटना (Most Important Christian Calendar Event) है जिसके इर्द-गिर्द अन्य सभी त्योहारों की तिथियां निर्धारित होती हैं। इसकी गणना चंद्रमा की स्थिति (Position of Moon) के आधार पर की जाती है। ईस्टर हमेशा वसंत विषुव (Vernal Equinox) के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के बाद के रविवार को पड़ता है। यही कारण है कि ईस्टर की तारीख हर साल बदलती रहती है, जो इसे एक 'चलायमान पर्व' (Movable Feast) बनाती है।

मसीही कैलेंडर (Christian Calendar) में ईस्टर का स्थान एक केंद्रीय धुरी की तरह है। इससे पहले चालीस दिनों का 'चालीसा काल' (Lent) आता है जो पश्चाताप और उपवास का समय होता है। ईस्टर के बाद 'ईस्टर का समय' (Eastertide) शुरू होता है जो पचास दिनों तक चलता है और 'पेंतेकुस्त' (Pentecost) के साथ समाप्त होता है। चर्च के वार्षिक चक्र (Annual Cycle) में यह समय सबसे अधिक उत्सव और खुशी का माना जाता है, जहाँ मृत्यु पर जीवन की जीत का जश्न मनाया जाता है।

ईसाई पंचांग (Christian Almanac) के अनुसार, ईस्टर केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक पूरी आध्यात्मिक यात्रा का शिखर है। 'होली वीक' (Holy Week) या पवित्र सप्ताह के दौरान खजूर रविवार (Palm Sunday), पवित्र गुरुवार और गुड फ्राइडे जैसी महत्वपूर्ण घटनाएं घटती हैं जो ईस्टर रविवार की सुबह में पूर्ण होती हैं। यह क्रमबद्ध घटनाचक्र (Sequence of Events) विश्वासियों को यीशु के दुःखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान के रहस्य (Mystery of Resurrection) को गहराई से समझने में मदद करता है।

इतिहास की दृष्टि से देखें तो ईस्टर (Easter) की तिथि को लेकर प्रारंभिक चर्च में कई विवाद हुए थे, जिन्हें बाद में 'नीसिया की परिषद' (Council of Nicaea) में सुलझाया गया। इस ऐतिहासिक निर्णय ने पूरी दुनिया के ईसाइयों को एक ही दिन ईस्टर मनाने के लिए एकजुट किया। यह एकता (Unity) ईसाई जगत की एक बड़ी विशेषता है। कैलेंडर की यह व्यवस्था प्रकृति के चक्र (Cycle of Nature) के साथ भी जुड़ी हुई है, जो जाड़े के बाद नई हरियाली और जीवन के आने का संकेत देती है।

ईस्टर के बिना मसीही कैलेंडर (Christian Calendar) अधूरा है क्योंकि यह प्रभु के वादों के पूरा होने का दिन है। यह घटना हमें समय की पवित्रता (Sanctity of Time) का बोध कराती है। हर साल जब यह त्योहार आता है, तो यह विश्वासियों को अपने आध्यात्मिक जीवन का नवीनीकरण (Spiritual Renewal) करने का अवसर देता है। कैलेंडर की यह प्रमुख घटना (Key Event) हमें याद दिलाती है कि समय का पहिया चाहे कितना भी घूमे, ईश्वर का प्रेम और सत्य सदैव अटल रहता है।
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