नगर कीर्तन (Nagar Kirtan) बैसाखी के उत्सव का सबसे भव्य और आकर्षक हिस्सा है, जो पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब (Guru Granth Sahib) के सम्मान में निकाली जाने वाली एक शोभायात्रा है। इसकी शुरुआत गुरुद्वारे से अरदास (Prayer) के बाद होती है और यह पूरे शहर या गांव के मुख्य मार्गों से गुजरती है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ईश्वर के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना और सामुदायिक एकता (Community Unity) का प्रदर्शन करना है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में नंगे पैर या पारंपरिक वेशभूषा में इस यात्रा में शामिल होते हैं।
शोभायात्रा का नेतृत्व पांच प्यारे (Panj Pyare) करते हैं जो केसरिया रंग के वस्त्र धारण किए होते हैं और उनके हाथों में 'निशान साहिब' (Nishan Sahib) और कृपाण (Sword) होती है। उनके पीछे फूलों से सजी हुई एक पालकी (Palki) होती है जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान होते हैं। रास्ते भर श्रद्धालु सड़कों की सफाई करते हैं और पालकी पर फूलों की वर्षा करते हैं। कीर्तन मंडलियां (Kirtan Groups) पवित्र भजनों (Hymns) का गायन करती हैं जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय (Devotional) हो जाता है।
नगर कीर्तन (Nagar Kirtan) के दौरान 'गतका' (Gatka) का प्रदर्शन एक प्रमुख आकर्षण होता है, जो सिखों की पारंपरिक युद्ध कला (Traditional Martial Art) है। नौजवान और बच्चे अपनी तलवारबाजी और लाठी चलाने के कौशल (Skills) का प्रदर्शन करते हैं, जो खालसा की वीरता और साहस (Bravery and Courage) की याद दिलाता है। इस प्रदर्शन को देखने के लिए सड़कों के किनारे हजारों की भीड़ जमा होती है। यह कला न केवल आत्मरक्षा सिखाती है बल्कि अनुशासन और ध्यान (Focus) भी बढ़ाती है।
स्थानीय निवासियों द्वारा रास्ते भर 'छबील' (Chabeel) और लंगर की व्यवस्था की जाती है। यात्रियों और राहगीरों को ठंडा मीठा पानी, फल और स्नैक्स (Snacks) वितरित किए जाते हैं। यह सेवा (Service) बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए खुली होती है, जो मानवता और परोपकार (Philanthropy) के महान आदर्शों को प्रस्तुत करती है। लोग अपनी स्वेच्छा से इस आयोजन में धन और श्रम (Labor) का योगदान देते हैं ताकि शोभायात्रा निर्विघ्न संपन्न हो सके।
नगर कीर्तन (Nagar Kirtan) का समापन वापस गुरुद्वारे में होता है जहाँ सामूहिक प्रार्थना और प्रसाद वितरण (Prasad Distribution) किया जाता है। यह शोभायात्रा समाज के विभिन्न वर्गों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है। यह केवल एक धार्मिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह शांति, सद्भाव (Harmony) और वैश्विक भाईचारे का एक सशक्त संदेश है। बैसाखी की यह परंपरा पीढ़ियों से सिख संस्कृति (Sikh Culture) की जीवंतता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।