बैसाखी के त्यौहार में 'लंगर' (Langar) या सामुदायिक रसोई का बहुत बड़ा स्थान है। गुरुद्वारों में बिना किसी भेदभाव के सभी जातियों और धर्मों के लोग एक ही पंक्ति (Line) में बैठकर सादा और शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। यह परंपरा समानता (Equality) और नम्रता का पाठ पढ़ाती है। भोजन तैयार करने से लेकर परोसने और बर्तन साफ करने तक का कार्य स्वयंसेवकों द्वारा निस्वार्थ भाव (Selfless Emotion) से किया जाता है। यह सेवा की भावना बैसाखी के आनंद को और भी बढ़ा देती है।
लंगर में परोसा जाने वाला भोजन (Food) दाल, सब्जी, रोटी और खीर जैसे पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। दान (Donation) के रूप में लोग अनाज, सब्जियां और धन गुरुद्वारे में समर्पित करते हैं। यह सामुदायिक सहयोग (Community Cooperation) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जहाँ हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देता है। लंगर की यह प्रथा समाज में प्रेम और सद्भाव (Harmony) को मजबूत करती है।
निस्वार्थ सेवा (Selfless Service) जिसे 'सेवा' (Seva) कहा जाता है, बैसाखी का एक अनिवार्य हिस्सा है। लोग सड़कों की सफाई करते हैं, ठंडे पानी की छबील (Water Stands) लगाते हैं और यात्रियों की मदद करते हैं। यह शारीरिक सेवा (Physical Service) अहंकार को मिटाने और मन को शुद्ध करने का एक माध्यम है। गुरु गोविंद सिंह जी ने सिखाया था कि मानव मात्र की सेवा ही ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा है। बैसाखी का दिन इस सिद्धांत को व्यवहार में लाने का एक विशेष अवसर (Special Occasion) है।
इस दिन कई जगहों पर रक्तदान शिविर (Blood Donation Camps) और स्वास्थ्य जांच शिविरों का भी आयोजन किया जाता है। लोग जरूरतमंदों को कपड़े और जूते दान करते हैं। यह सामाजिक उत्तरदायित्व (Social Responsibility) की भावना ईस्टर या बैसाखी जैसे त्योहारों को और भी गरिमामय बनाती है। परोपकार (Benevolence) के इन कार्यों से समाज के वंचित वर्गों को भी उत्सव की मुख्यधारा में शामिल होने का मौका मिलता है। यह त्यौहार हमें दयालु और उदार (Generous) बनने की शिक्षा देता है।
बैसाखी की यह सेवा भावना (Service Spirit) केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी जहाँ सिख समुदाय रहता है, वहां लंगर का आयोजन किया जाता है। यह वैश्विक भाईचारे (Global Brotherhood) का संदेश फैलाता है। जब हम दूसरों के लिए कुछ करते हैं, तो हमें एक आत्मिक संतुष्टि (Spiritual Satisfaction) प्राप्त होती है। बैसाखी का पर्व हमें याद दिलाता है कि खुशियाँ तभी सार्थक हैं जब वे सबके साथ साझा की जाएं। यह मानवता के प्रति हमारे समर्पण का प्रतीक है।