सिख समुदाय और पंजाब में समय की गणना के लिए नानकशाही कैलेंडर (Nanakshahi Calendar) का उपयोग किया जाता है, जिसका पहला महीना 'चेत' (Chet) होता है। हालांकि, बैसाखी को औपचारिक उत्सव (Official Celebration) के रूप में नए साल की तरह मनाया जाता है क्योंकि यह फसल और खालसा स्थापना से जुड़ा है। नानकशाही कैलेंडर के बारह महीने प्रकृति के बदलते रंगों (Changing Colors of Nature) और गुरुओं की वाणी के अनुसार निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक महीने का अपना एक विशेष आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance) होता है।
कैलेंडर का प्रथम मास चेत (Chet) मार्च-अप्रैल के समय आता है, जब कुदरत अपने पूरे शबाब पर होती है। इसके बाद बैसाख, जेठ, हाड़, सावन, भादों, अस्सू, कात्तिक, मघर, पोह, माघ और अंत में फागुन आता है। ये महीने ऋतुओं के चक्र (Seasonal Cycle) को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, पोह (Poh) के महीने में कड़ाके की ठंड और शहादत की यादें होती हैं, जबकि माघ (Magh) में बसंत का आगमन होने लगता है। यह कैलेंडर पूरी तरह से वैज्ञानिक और खगोलीय गणनाओं (Astronomical Calculations) पर आधारित है।
पंजाबी नव वर्ष (Punjabi New Year) के आगमन पर 'बारहमासा' (Barahmaha) का पाठ किया जाता है, जो गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज है। इसमें गुरु साहिबान ने हर महीने के बदलते मौसम के माध्यम से ईश्वर से मिलन की तड़प और भक्ति (Devotion) की व्याख्या की है। श्रद्धालु नए महीने के पहले दिन गुरुद्वारे जाकर 'संगरांद' (Sangrand) का त्यौहार मनाते हैं। यह परंपरा मन को शांत रखने और आने वाले समय को ईश्वर की रज़ा (God's Will) में स्वीकार करने की शक्ति देती है।
समय की इस गणना में सौर और चंद्र स्थितियों (Solar and Lunar Positions) का विशेष ध्यान रखा जाता है। पंजाबी नव वर्ष (Punjabi New Year) का निर्धारण अक्सर वैशाख संक्रांति से होता है। यह दिन पंचांग के अनुसार बहुत पवित्र माना जाता है और कई लोग इस दिन पवित्र सरोवरों (Holy Pools) में स्नान करते हैं। यह अभ्यास न केवल धार्मिक है, बल्कि यह व्यक्ति को मानसिक रूप से तरोताजा (Refreshed) और अनुशासित बनाने में भी सहायक सिद्ध होता है।
आज के आधुनिक युग (Modern Age) में भी पंजाबी समुदाय अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है। चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में हों, नानकशाही कैलेंडर (Nanakshahi Calendar) के अनुसार अपने पर्वों की तिथि निर्धारित करते हैं। नया साल आने पर गुरुद्वारों में विशेष दीवान सजाए जाते हैं और संगत को गुरु के इतिहास (History of Gurus) से अवगत कराया जाता है। यह कैलेंडर पंजाबी संस्कृति और गौरव (Punjabi Culture and Pride) को संजोए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।