बैसाखी के अवसर पर गुरुद्वारा सेलिब्रेशन (Gurudwara Celebrations) अपनी पवित्रता और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। गुरुद्वारों को रोशनी और फूलों से भव्य रूप से सजाया जाता है, और सुबह अमृत वेले से ही भक्तों का तांता लग जाता है। विशेष 'दीवान' (Religious Assemblies) सजाए जाते हैं जहाँ प्रसिद्ध कीर्तनी जत्थे बाणी का गायन करते हैं। गुरु साहिब के शस्त्रों के दर्शन (Display of Holy Weapons) कराना इस दिन का एक विशेष आकर्षण होता है, जो वीरता की याद दिलाता है।
धार्मिक अनुष्ठानों (Religious Rituals) के अंतर्गत इस दिन 'निशान साहिब' का चोला बदलने की रस्म निभाई जाती है। पुराने वस्त्र को हटाकर नए केसरिया चोले (Saffron Robe) को दूध और पानी से धोकर चढ़ाया जाता है। श्रद्धालु इस सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और इसे अपने सौभाग्य (Good Fortune) के रूप में देखते हैं। यह प्रक्रिया सिख ध्वज के सम्मान और खालसा के निरंतर अस्तित्व (Continuous Existence of Khalsa) का प्रतीक मानी जाती है।
सामुदायिक सेवा (Community Service) के रूप में 'लंगर' की व्यवस्था अत्यंत व्यापक होती है। गुरुद्वारे में आने वाले हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के स्वादिष्ट और शुद्ध भोजन परोसा जाता है। लोग अपनी मेहनत की कमाई का 'दसवंध' (Tithe or Tenth Part) इस दिन दान करते हैं ताकि लंगर की सेवा चलती रहे। बर्तन साफ करना, सब्जियां काटना और भोजन परोसना विनम्रता (Humility) सीखने का एक व्यावहारिक माध्यम है। यह सेवा भावना ही सिख धर्म का मूल आधार है।
गुरुद्वारा सेलिब्रेशन (Gurudwara Celebrations) के दौरान बच्चों के लिए कविता पाठ और इतिहास की प्रतियोगिताएं (History Competitions) भी आयोजित की जाती हैं। इससे नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और गुरुओं के बलिदानों (Sacrifices of Gurus) की जानकारी मिलती है। कई गुरुद्वारों में मुफ्त चिकित्सा शिविर और रक्तदान शिविर (Blood Donation Camps) लगाए जाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ समाज कल्याण (Social Welfare) भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
शाम के समय 'रहराज साहिब' के पाठ के बाद विशेष आतिशबाजी (Fireworks Display) की जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी को दर्शाती है। गुरुद्वारा सेलिब्रेशन (Gurudwara Celebrations) हमें शांति, धीरज और परोपकार (Benevolence) के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु एक नई ऊर्जा और ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम (Divine Love) लेकर घर लौटता है। यह पर्व वास्तव में रूहानी आनंद और सेवा का एक महाकुंभ है।