पटवारी का पद राज्य सरकार की सेवा के अंतर्गत आता है और इसका वेतनमान (Pay Scale) सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के ग्रेड पे के अनुसार निर्धारित होता है। एक नवनियुक्त पटवारी का मूल वेतन (Basic Pay) काफी आकर्षक होता है जो समय के साथ वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) के कारण बढ़ता रहता है। आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से यह ग्रामीण क्षेत्रों में एक बहुत ही स्थिर और सम्मानजनक नौकरी मानी जाती है।
मूल वेतन के अतिरिक्त पटवारी को कई प्रकार के भत्ते (Allowances) भी दिए जाते हैं। इनमें महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) सबसे प्रमुख है जो केंद्र और राज्य सरकार की घोषणाओं के अनुसार बढ़ता रहता है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने हेतु आवास भत्ता (House Rent Allowance) और यात्रा भत्ता (Traveling Allowance) भी प्रदान किया जाता है ताकि फील्ड ड्यूटी के दौरान होने वाले खर्चों की प्रतिपूर्ति हो सके।
सरकारी सेवा में होने के कारण पटवारी को चिकित्सा सुविधाएं (Medical Facilities) और सवेतन अवकाश (Paid Leaves) का लाभ भी मिलता है। गंभीर बीमारियों के उपचार हेतु चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) की सुविधा कर्मचारी और उसके परिवार के लिए उपलब्ध रहती है। यह सुविधाएं निजी क्षेत्र की नौकरियों की तुलना में इस पद को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय (Reliable) बनाती हैं।
कार्य के दौरान तकनीकी उपकरणों जैसे टैबलेट या स्मार्टफोन के उपयोग हेतु भी सरकार द्वारा विशेष डेटा भत्ता (Data Allowance) दिया जाता है। चूंकि पटवारी को अक्सर क्षेत्र में रहना पड़ता है, इसलिए उनके मोबाइल और इंटरनेट खर्चों का वहन भी विभाग द्वारा किया जाता है। यह छोटे-छोटे भत्ते मिलकर मासिक वेतन (Monthly Salary) को एक अच्छी राशि बना देते हैं।
भविष्य की सुरक्षा के लिए नई पेंशन योजना (New Pension Scheme) के तहत अंशदान भी किया जाता है। सेवानिवृत्ति (Retirement) के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी और अन्य लाभ कर्मचारी के बुढ़ापे को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाते हैं। पदोन्नति (Promotion) होने पर वेतनमान में बड़ी छलांग लगती है, जिससे सामाजिक और आर्थिक स्तर (Economic Status) में निरंतर सुधार होता रहता है।