पटवारी बनने के लिए उम्मीदवार का संबंधित राज्य का मूल निवासी (Bonafide Resident) होना एक अनिवार्य शर्त मानी जाती है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया अधिवास प्रमाणपत्र (Domicile Certificate) होना आवश्यक है ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिल सके। उम्मीदवार का मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ (Physically Fit) होना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस नौकरी में बहुत अधिक फील्ड वर्क (Field Work) शामिल होता है।
चरित्र सत्यापन (Character Verification) चयन प्रक्रिया का एक अभिन्न हिस्सा है, जहाँ यह सुनिश्चित किया जाता है कि उम्मीदवार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Record) न हो। पुलिस सत्यापन के दौरान यदि कोई प्रतिकूल जानकारी सामने आती है, तो चयन निरस्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, पटवारी को समाज के विभिन्न वर्गों के साथ समन्वय बिठाना होता है, इसलिए उनका व्यवहार कुशल होना भी एक अप्रत्यक्ष योग्यता मानी जाती है।
आरक्षण (Reservation) के लाभ प्राप्त करने के लिए उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास नवीनतम और वैध दस्तावेज (Valid Documents) हों। यदि कोई अभ्यर्थी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अंतर्गत आवेदन कर रहा है, तो उसे आय और संपत्ति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। श्रेणी के आधार पर मिलने वाली सभी रियायतें तभी लागू होती हैं जब दस्तावेज पूरी तरह सही और सरकारी मानकों (Government Standards) के अनुरूप हों।
विवाहित उम्मीदवारों के लिए भी कुछ विशिष्ट नियम लागू हो सकते हैं, जैसे जीवित बच्चों की संख्या संबंधी नियम जो कई राज्यों ने अनिवार्य किए हैं। यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित संख्या से अधिक संतान (Children) रखता है, तो वह सरकारी सेवा के लिए अपात्र (Ineligible) घोषित किया जा सकता है। ऐसे नियमों की विस्तृत जानकारी भर्ती विज्ञापन (Job Advertisement) में दी जाती है, जिसे आवेदन से पहले ध्यान से पढ़ना चाहिए।
अंतिम रूप से चयनित होने के बाद पटवारी को एक शपथ पत्र (Affidavit) भी देना पड़ता है कि उनके द्वारा दी गई सभी जानकारी पूर्णतः सत्य है। यदि सेवा के दौरान कभी भी कोई शैक्षणिक दस्तावेज या पात्रता संबंधी प्रमाण पत्र फर्जी (Fake) पाया जाता है, तो उन्हें तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। पारदर्शिता और ईमानदारी इस सेवा के मूल सिद्धांत हैं, जिनका पालन भर्ती के समय से ही अपेक्षित होता है।