भूमि अभिलेख प्रबंधन (Land Record Management) के अंतर्गत पटवारी 'खसरा' (Khasra) नामक एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज का रखरखाव करता है। खसरा एक ऐसा रजिस्टर (Register) है जिसमें प्रत्येक खेत का सर्वेक्षण नंबर (Survey Number), उसका क्षेत्रफल और मिट्टी की गुणवत्ता का विवरण दर्ज होता है। यह दस्तावेज यह भी बताता है कि किसी विशेष मौसम (Season) में खेत में कौन सी फसल बोई गई है और सिंचाई का साधन क्या है।
'खतौनी' (Khatauni) एक अन्य प्रमुख अभिलेख है जो स्वामित्व (Ownership) का विवरण प्रदान करता है। इसमें एक ही व्यक्ति या परिवार की विभिन्न स्थानों पर स्थित जमीनों का संक्षिप्त ब्योरा एक ही स्थान पर दर्ज होता है। पटवारी यह सुनिश्चित करता है कि खतौनी में मालिकाना हक (Legal Title) की जानकारी पूरी तरह से सही हो ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद (Legal Dispute) से बचा जा सके।
पटवारी के पास गाँव का एक विस्तृत मानचित्र (Map) होता है जिसे 'शजरा' (Shajra) कहा जाता है। इस मानचित्र में गाँव की सीमाएं, रास्ते, जल स्रोत और प्रत्येक खेत की भौगोलिक स्थिति (Geographical Location) अंकित होती है। सीमा विवादों (Boundary Disputes) के समाधान के समय इसी मानचित्र को आधार मानकर भूमि की पैमाइश (Measurement) की जाती है, जो कि अत्यंत तकनीकी कार्य है।
दैनिक गतिविधियों के लिए पटवारी एक 'रोजनामचा' (Diary) भी रखता है जिसमें वह अपने क्षेत्र में होने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं और सरकारी दौरों का विवरण लिखता है। इसमें किसी भी आकस्मिक घटना जैसे ओलावृष्टि या टिड्डियों के हमले की जानकारी तुरंत दर्ज की जाती है। यह डायरी वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक आधिकारिक साक्ष्य (Official Evidence) के रूप में कार्य करती है जिससे क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।
आधुनिक समय में इन सभी पारंपरिक दस्तावेजों का कंप्यूटरीकरण (Computerization) किया जा रहा है। पटवारी अब डिजिटल पोर्टल (Digital Portal) पर डेटा प्रविष्टियां (Data Entries) करता है जिससे पारदर्शिता (Transparency) बढ़ती है। ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड (Online Land Records) के माध्यम से किसान अब घर बैठे अपनी जमीन की नकल प्राप्त कर सकते हैं, जिससे पटवारी के कार्य की शुद्धता और गति में भी सुधार आया है।