अग्निवीर भर्ती परीक्षा का प्रारूप (Pattern) अलग-अलग श्रेणियों जैसे सामान्य ड्यूटी (GD), तकनीकी (Technical) और क्लर्क के लिए भिन्न होता है। सामान्य ड्यूटी (General Duty) के लिए परीक्षा में कुल 50 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का होता है। इसमें सामान्य ज्ञान के 15, सामान्य विज्ञान के 15, गणित के 15 और तर्कशक्ति के 5 प्रश्न शामिल होते हैं। यह 100 अंकों की परीक्षा उम्मीदवार की बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) को परखने के लिए डिज़ाइन की गई है।
तकनीकी पदों (Technical Posts) के लिए परीक्षा का स्तर थोड़ा ऊँचा होता है और इसमें विज्ञान के विषयों पर अधिक भार दिया जाता है। इस प्रारूप (Pattern) में भौतिकी और रसायन विज्ञान के जटिल प्रश्न शामिल होते हैं जो उच्च माध्यमिक स्तर (Higher Secondary Level) के होते हैं। तकनीकी अग्निवीरों के लिए गणित की समझ भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि उन्हें भविष्य में जटिल प्रणालियों (Systems) का संचालन करना होता है। इसमें कुल 200 अंकों का प्रावधान हो सकता है।
क्लर्क और स्टोर कीपर (Store Keeper) पदों के लिए अंग्रेजी भाषा (English Language) की परीक्षा एक अनिवार्य हिस्सा है। इस अनुभाग में व्याकरण (Grammar), शब्दावली और बोधगम्यता का परीक्षण किया जाता है। क्लर्क के लिए अंकों का विभाजन (Division of Marks) इस प्रकार किया जाता है कि उनकी प्रशासनिक सक्षमता (Administrative Competence) जांची जा सके। कंप्यूटर के बुनियादी ज्ञान (Basic Computer Knowledge) से संबंधित प्रश्न भी इस श्रेणी में पूछे जाते हैं।
नकारात्मक अंकन (Negative Marking) इस परीक्षा का एक चुनौतीपूर्ण पहलू है, जहाँ प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.5 अंक काटे जाते हैं। यह प्रणाली उम्मीदवारों को अंदाज़ा लगाने (Guesswork) के बजाय सटीक उत्तर देने के लिए प्रेरित करती है। परीक्षा की कुल अवधि (Duration) आमतौर पर 60 मिनट की होती है, जिसके कारण समय का कुशल उपयोग (Efficient Use of Time) अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। डिजिटल परीक्षा (Digital Exam) होने के कारण स्क्रीन पर समय का ध्यान रखना आवश्यक है।
शारीरिक परीक्षण के अंकों का योग भी अंतिम चयन (Final Selection) में बड़ी भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए, 1.6 किमी की दौड़ को उत्कृष्ट समय में पूरा करने पर 60 अंक और बीम (Pull-ups) पर 40 अंक मिलते हैं। लिखित परीक्षा (Written Test) और शारीरिक परीक्षण के अंकों को मिलाकर ही अंतिम मेरिट (Final Merit) का निर्धारण किया जाता है। इसलिए दोनों ही क्षेत्रों में संतुलित प्रदर्शन करना ही सफलता का एकमात्र मार्ग है।