बहुत कम लोग जानते हैं कि डॉक्टर अंबेडकर एक महान अर्थशास्त्री (Economist) भी थे और भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की स्थापना उनके विचारों पर आधारित है। उनकी पुस्तक 'द प्रॉब्लम ऑफ द रूपी' (The Problem of the Rupee) ने मुद्रा के विनिमय और नियंत्रण (Currency Control) के क्षेत्र में क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत किए थे। हिल्टन यंग कमीशन (Hilton Young Commission) के सामने उन्होंने जो साक्ष्य प्रस्तुत किए, उन्हीं को आधार बनाकर भारत के केंद्रीय बैंक (Central Bank) की रूपरेखा तैयार की गई थी। जयंती के अवसर पर उनकी इस आर्थिक विद्वत्ता (Economic Scholarship) को भी सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।
उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय (Columbia University) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में उच्च डिग्री प्राप्त की थी। बाबासाहेब ने कृषि क्षेत्र में सुधार (Agricultural Reforms) और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 'सामूहिक खेती' (Collective Farming) का सुझाव दिया था। उनका मानना था कि छोटे भूखंडों (Small Landholdings) पर खेती करना आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं (Irrigation Projects) और बहुउद्देशीय नदी घाटी योजनाओं की नींव रखी, ताकि देश को अकाल (Famine) जैसी आपदाओं से बचाया जा सके।
श्रम अधिकारों (Labor Rights) की दिशा में भी उनके कार्य अतुलनीय हैं। जब वे वायसराय की कार्यकारी परिषद (Viceroy's Executive Council) में श्रम सदस्य थे, तब उन्होंने काम के घंटों को 12 से घटाकर 8 घंटे (8 Hours Work Day) करवाया था। उन्होंने महंगाई भत्ता (Dearness Allowance), चिकित्सा अवकाश (Medical Leave) और कर्मचारी बीमा जैसी क्रांतिकारी सुविधाएं शुरू कीं। बाबासाहेब ने यह सुनिश्चित किया कि मजदूरों का शोषण न हो और उन्हें उनके श्रम का उचित मूल्य (Fair Wages) प्राप्त हो। उनकी ये नीतियां आज भी भारत के श्रम कानूनों (Labor Laws) का आधार हैं।
डॉक्टर अंबेडकर ने भारत के औद्योगीकरण (Industrialization) पर विशेष जोर दिया क्योंकि उनका मानना था कि केवल खेती पर निर्भर रहकर गरीबी (Poverty) दूर नहीं की जा सकती। उन्होंने बिजली उत्पादन (Power Generation) और राष्ट्रीय ग्रिड (National Grid) की स्थापना के लिए केंद्रीय विद्युत बोर्ड का गठन किया। वे जानते थे कि उद्योगों के विकास के लिए सस्ती और निरंतर बिजली की आपूर्ति (Power Supply) अनिवार्य है। उनका आर्थिक दृष्टिकोण (Economic Vision) समावेशी विकास पर आधारित था जहाँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचे।
जयंती के आयोजनों में अक्सर उनके वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) और कर सुधारों (Tax Reforms) पर चर्चा की जाती है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के बंटवारे (Revenue Sharing) के लिए वित्त आयोग (Finance Commission) की स्थापना की वकालत की थी। बाबासाहेब ने अर्थशास्त्र को केवल आंकड़ों का खेल नहीं माना, बल्कि उसे समाज के कल्याण का विज्ञान (Science of Welfare) बनाया। उनके आर्थिक विचार आज भी नीति निर्माताओं (Policy Makers) के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं जो एक समृद्ध भारत का सपना देखते हैं।