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बोहाग बिहू (Bohag Bihu) जिसे रोंगाली बिहू (Rangali Bihu) के नाम से भी जाना जाता है, असम का सबसे महत्वपूर्ण और रंगीन त्यौहार है। यह उत्सव केवल एक दिन का नहीं बल्कि पूरे सात दिनों तक चलता है, जिसे 'सात बिहू' (Sati Bihu) कहा जाता है। उत्सव की शुरुआत 'गुरू बिहू' (Goru Bihu) से होती है, जो पूरी तरह से पशुधन (Livestock) और गायों को समर्पित है। इस दिन पशुओं को नदी में नहलाया जाता है और उनकी लंबी आयु के लिए प्रार्थना की जाती है, क्योंकि कृषि प्रधान समाज में पशुओं का स्थान बहुत ऊँचा है।

दूसरे दिन को 'मानुह बिहू' (Manuh Bihu) कहा जाता है, जिसमें लोग नए वस्त्र धारण करते हैं और अपने बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन एक-दूसरे को 'गमोसा' (Gamosa) भेंट करने की परंपरा है, जो असमिया संस्कृति (Assamese Culture) और सम्मान का प्रतीक है। लोग अपने घरों में पारंपरिक व्यंजन जैसे 'पीठा' (Pitha) और 'लारू' (Laroo) बनाते हैं और पड़ोसियों के साथ खुशियाँ साझा करते हैं। यह दिन आपसी भाईचारे और प्रेम को प्रगाढ़ करने का अवसर प्रदान करता है।

तीसरे दिन 'गोसाईं बिहू' (Gosai Bihu) मनाया जाता है, जिसमें लोग मंदिरों और नामघरों (Namghars) में जाकर ईश्वर की स्तुति करते हैं। सामूहिक प्रार्थना और कीर्तन (Kirtan) के माध्यम से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। उत्सव के अगले दिनों में 'ताँत बिहू' (Tant Bihu), 'नांगल बिहू' (Nangal Bihu) और 'सनेही बिहू' (Sanehi Bihu) जैसे चरण आते हैं, जो कृषि उपकरणों (Farming Tools) और मानवीय संबंधों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है।

बोहाग बिहू का सातवाँ और अंतिम दिन 'चेरा बिहू' (Chera Bihu) कहलाता है, जो इस भव्य उत्सव के समापन का प्रतीक है। इस दौरान असम के गाँवों और शहरों में 'बिहू टोली' (Bihu Toli) द्वारा बिहू नृत्य (Bihu Dance) और गीतों का प्रदर्शन किया जाता है। ढोल (Dhol), पेपा (Pepa) और गोगोना (Gogona) जैसे वाद्ययंत्रों की ध्वनि से पूरा वातावरण गूँज उठता है। यह उत्सव प्रकृति के पुनर्जन्म और नई फसलों की बुवाई के मौसम का स्वागत करने का एक अद्भुत तरीका है।

इस त्यौहार का मुख्य आकर्षण मुक्त आकाश के नीचे किया जाने वाला नृत्य है, जिसमें युवा लड़के और लड़कियाँ अपनी पारंपरिक वेशभूषा (Traditional Attire) में प्रदर्शन करते हैं। बिहू के गीत जिन्हें 'बिहू गीत' (Bihu Geet) कहा जाता है, वे अक्सर प्रेम और प्रकृति के सौंदर्य पर आधारित होते हैं। सात दिनों का यह सिलसिला असमिया जनजीवन की जीवंतता (Vitality) और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) को दर्शाता है। यह त्यौहार भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर सभी समुदायों को एक सूत्र में पिरोता है।

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बोहाग बिहू (Bohag Bihu) जिसे रोंगाली बिहू (Rangali Bihu) के नाम से भी जाना जाता है, असम का सबसे महत्वपूर्ण और रंगीन त्यौहार है। यह उत्सव केवल एक दिन का नहीं बल्कि पूरे सात दिनों तक चलता है, जिसे 'सात बिहू' (Sati Bihu) कहा जाता है। उत्सव की शुरुआत 'गुरू बिहू' (Goru Bihu) से होती है, जो पूरी तरह से पशुधन (Livestock) और गायों को समर्पित है। इस दिन पशुओं को नदी में नहलाया जाता है और उनकी लंबी आयु के लिए प्रार्थना की जाती है, क्योंकि कृषि प्रधान समाज में पशुओं का स्थान बहुत ऊँचा है।

दूसरे दिन को 'मानुह बिहू' (Manuh Bihu) कहा जाता है, जिसमें लोग नए वस्त्र धारण करते हैं और अपने बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन एक-दूसरे को 'गमोसा' (Gamosa) भेंट करने की परंपरा है, जो असमिया संस्कृति (Assamese Culture) और सम्मान का प्रतीक है। लोग अपने घरों में पारंपरिक व्यंजन जैसे 'पीठा' (Pitha) और 'लारू' (Laroo) बनाते हैं और पड़ोसियों के साथ खुशियाँ साझा करते हैं। यह दिन आपसी भाईचारे और प्रेम को प्रगाढ़ करने का अवसर प्रदान करता है।

तीसरे दिन 'गोसाईं बिहू' (Gosai Bihu) मनाया जाता है, जिसमें लोग मंदिरों और नामघरों (Namghars) में जाकर ईश्वर की स्तुति करते हैं। सामूहिक प्रार्थना और कीर्तन (Kirtan) के माध्यम से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। उत्सव के अगले दिनों में 'ताँत बिहू' (Tant Bihu), 'नांगल बिहू' (Nangal Bihu) और 'सनेही बिहू' (Sanehi Bihu) जैसे चरण आते हैं, जो कृषि उपकरणों (Farming Tools) और मानवीय संबंधों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है।

बोहाग बिहू का सातवाँ और अंतिम दिन 'चेरा बिहू' (Chera Bihu) कहलाता है, जो इस भव्य उत्सव के समापन का प्रतीक है। इस दौरान असम के गाँवों और शहरों में 'बिहू टोली' (Bihu Toli) द्वारा बिहू नृत्य (Bihu Dance) और गीतों का प्रदर्शन किया जाता है। ढोल (Dhol), पेपा (Pepa) और गोगोना (Gogona) जैसे वाद्ययंत्रों की ध्वनि से पूरा वातावरण गूँज उठता है। यह उत्सव प्रकृति के पुनर्जन्म और नई फसलों की बुवाई के मौसम का स्वागत करने का एक अद्भुत तरीका है।

इस त्यौहार का मुख्य आकर्षण मुक्त आकाश के नीचे किया जाने वाला नृत्य है, जिसमें युवा लड़के और लड़कियाँ अपनी पारंपरिक वेशभूषा (Traditional Attire) में प्रदर्शन करते हैं। बिहू के गीत जिन्हें 'बिहू गीत' (Bihu Geet) कहा जाता है, वे अक्सर प्रेम और प्रकृति के सौंदर्य पर आधारित होते हैं। सात दिनों का यह सिलसिला असमिया जनजीवन की जीवंतता (Vitality) और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) को दर्शाता है। यह त्यौहार भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर सभी समुदायों को एक सूत्र में पिरोता है।
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