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रोंगाली बिहू डांस (Rangali Bihu Dance) असम की जीवंतता और खुशहाली का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस नृत्य को बिहू नास (Bihu Naas) भी कहा जाता है, जिसमें युवा लड़के और लड़कियाँ अपनी पारंपरिक वेशभूषा (Traditional Attire) पहनकर भाग लेते हैं। इस नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तेज गति (Fast Tempo) और हाथों का तीव्र संचालन है। नर्तक अपनी कमर को एक विशिष्ट लय में हिलाते हैं, जो प्रकृति की ऊर्जा और यौवन (Youthfulness) के उल्लास को प्रदर्शित करता है।

नृत्य के दौरान लड़कियाँ 'मेखला चादर' (Mekhela Chador) पहनती हैं, जो रेशम (Silk) से बनी होती है, और लड़के 'धोती-गमोसा' धारण करते हैं। बिहू नास (Bihu Naas) केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से चली आ रही उर्वरता और कृषि (Agriculture) की खुशहाली का उत्सव है। नृत्य की मुद्राएं फसल की कटाई और बुवाई की प्रक्रियाओं से प्रेरित होती हैं। यह सामूहिक रूप से किया जाने वाला प्रदर्शन है जो समाज में एकता (Unity) और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।

बिहू नृत्य में संगीत का बहुत बड़ा योगदान होता है, जहाँ ढोल (Dhol) की थाप पर नर्तकों के पैर थिरकते हैं। 'पेपा' (Pepa) की गूँज और 'ताल' (Tal) की खनक इस नृत्य को और भी अधिक प्रभावशाली बना देती है। नर्तकियाँ अपने हाथों में 'गोगोना' (Gogona) और 'सुतली' जैसे छोटे वाद्ययंत्रों का भी प्रयोग करती हैं। यह नृत्य असमिया पहचान (Assamese Identity) का एक वैश्विक प्रतीक बन चुका है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों (International Platforms) पर भी बड़े गर्व के साथ प्रदर्शित किया जाता है।

वसंत ऋतु (Spring Season) के आगमन पर जब पेड़ों में नई पत्तियां आती हैं, तब बिहू नास (Bihu Naas) का आनंद दोगुना हो जाता है। खुले मैदानों या 'बिहू टोली' (Bihu Toli) में आयोजित यह नृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। नृत्य के बोल अक्सर प्रेम और सौंदर्य (Love and Beauty) पर आधारित होते हैं, जो युवाओं के हृदय की भावनाओं को व्यक्त करते हैं। यह एक ऐसी कला है जो पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक परंपरा (Oral Tradition) के माध्यम से आगे बढ़ रही है।

आजकल रोंगाली बिहू डांस (Rangali Bihu Dance) में आधुनिक बदलाव भी देखे जा रहे हैं, जहाँ इसे स्टेज परफॉर्मेंस (Stage Performance) के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है। हालांकि, इसकी मूल आत्मा और पारंपरिक जड़ें आज भी वैसी ही हैं। स्कूलों और कॉलेजों में भी बिहू नृत्य की शिक्षा दी जाती है ताकि युवा अपनी संस्कृति से जुड़े रहें। यह नृत्य असम की मिट्टी की खुशबू और वहां के लोगों के सरल परंतु ऊर्जावान जीवन (Energetic Life) का प्रतिबिंब है।

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रोंगाली बिहू डांस (Rangali Bihu Dance) असम की जीवंतता और खुशहाली का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस नृत्य को बिहू नास (Bihu Naas) भी कहा जाता है, जिसमें युवा लड़के और लड़कियाँ अपनी पारंपरिक वेशभूषा (Traditional Attire) पहनकर भाग लेते हैं। इस नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तेज गति (Fast Tempo) और हाथों का तीव्र संचालन है। नर्तक अपनी कमर को एक विशिष्ट लय में हिलाते हैं, जो प्रकृति की ऊर्जा और यौवन (Youthfulness) के उल्लास को प्रदर्शित करता है।

नृत्य के दौरान लड़कियाँ 'मेखला चादर' (Mekhela Chador) पहनती हैं, जो रेशम (Silk) से बनी होती है, और लड़के 'धोती-गमोसा' धारण करते हैं। बिहू नास (Bihu Naas) केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से चली आ रही उर्वरता और कृषि (Agriculture) की खुशहाली का उत्सव है। नृत्य की मुद्राएं फसल की कटाई और बुवाई की प्रक्रियाओं से प्रेरित होती हैं। यह सामूहिक रूप से किया जाने वाला प्रदर्शन है जो समाज में एकता (Unity) और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।

बिहू नृत्य में संगीत का बहुत बड़ा योगदान होता है, जहाँ ढोल (Dhol) की थाप पर नर्तकों के पैर थिरकते हैं। 'पेपा' (Pepa) की गूँज और 'ताल' (Tal) की खनक इस नृत्य को और भी अधिक प्रभावशाली बना देती है। नर्तकियाँ अपने हाथों में 'गोगोना' (Gogona) और 'सुतली' जैसे छोटे वाद्ययंत्रों का भी प्रयोग करती हैं। यह नृत्य असमिया पहचान (Assamese Identity) का एक वैश्विक प्रतीक बन चुका है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों (International Platforms) पर भी बड़े गर्व के साथ प्रदर्शित किया जाता है।

वसंत ऋतु (Spring Season) के आगमन पर जब पेड़ों में नई पत्तियां आती हैं, तब बिहू नास (Bihu Naas) का आनंद दोगुना हो जाता है। खुले मैदानों या 'बिहू टोली' (Bihu Toli) में आयोजित यह नृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। नृत्य के बोल अक्सर प्रेम और सौंदर्य (Love and Beauty) पर आधारित होते हैं, जो युवाओं के हृदय की भावनाओं को व्यक्त करते हैं। यह एक ऐसी कला है जो पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक परंपरा (Oral Tradition) के माध्यम से आगे बढ़ रही है।

आजकल रोंगाली बिहू डांस (Rangali Bihu Dance) में आधुनिक बदलाव भी देखे जा रहे हैं, जहाँ इसे स्टेज परफॉर्मेंस (Stage Performance) के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है। हालांकि, इसकी मूल आत्मा और पारंपरिक जड़ें आज भी वैसी ही हैं। स्कूलों और कॉलेजों में भी बिहू नृत्य की शिक्षा दी जाती है ताकि युवा अपनी संस्कृति से जुड़े रहें। यह नृत्य असम की मिट्टी की खुशबू और वहां के लोगों के सरल परंतु ऊर्जावान जीवन (Energetic Life) का प्रतिबिंब है।
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