0 like 0 dislike
18 views
in Entertainment by (143k points)
बिहू गीत (Bihu Geet) असमिया लोक संगीत की वह मधुर विधा है जो प्रेम, प्रकृति और दैनिक जीवन के संघर्षों को सुरों में पिरोती है। ये गीत सरल भाषा में लिखे जाते हैं लेकिन इनका प्रभाव बहुत गहरा होता है। रोंगाली बिहू के दौरान गाए जाने वाले गीतों में 'हुसोरी' (Husori) का स्थान अत्यंत पूजनीय है। बिहू हुसोरी (Bihu Husori) में गाँव के बुजुर्गों और युवाओं का एक समूह घर-घर जाकर आशीर्वाद देता है और सुख-शांति की कामना करता है।

हुसोरी (Husori) गायन की शुरुआत आमतौर पर गाँव के 'नामघर' (Namghar) या किसी मंदिर से होती है। समूह के सदस्य आंगन में गोल घेरा बनाकर खड़े होते हैं और ढोल व ताल की संगत में गीत गाते हैं। इन गीतों में ईश्वर की स्तुति (Prayer) और मानवता के कल्याण का संदेश होता है। जब हुसोरी की टोली किसी के घर पहुँचती है, तो गृहस्वामी उन्हें 'गमोसा' (Gamosa) और दक्षिणा देकर सम्मानित करता है। यह परंपरा सामाजिक पदानुक्रम को मिटाकर सबको एक सूत्र (Thread of Oneness) में बाँधती है।

सामाजिक रूप से बिहू गीत (Bihu Geet) समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद का एक माध्यम हैं। गीतों के बोलों में असम के इतिहास, भूगोल और वहां की वनस्पतियों का सुंदर वर्णन मिलता है। ये गीत मौखिक साहित्य (Oral Literature) का हिस्सा हैं, जो बिना किसी लिखित लिपि के सदियों से जीवित हैं। बिहू हुसोरी (Bihu Husori) के दौरान गाए जाने वाले आशीर्वाद (Blessings) को लोग बहुत शुभ मानते हैं और विश्वास करते हैं कि इससे फसल अच्छी होगी और परिवार में समृद्धि आएगी।

संगीत की दृष्टि से बिहू गीत (Bihu Geet) अपनी विशिष्ट लय और सुर के लिए जाने जाते हैं। 'पेपा' (Pepa) की आवाज़ इन गीतों में एक अनोखी मिठास और जोश भर देती है। हुसोरी के दौरान किए जाने वाले नृत्य में गंभीरता (Sobriety) होती है, जो उसे सामान्य बिहू नृत्य से थोड़ा अलग बनाती है। यह परंपरा बुजुर्गों के अनुभवों और युवाओं के उत्साह का एक सुंदर मेल है। हुसोरी दल का हर सदस्य एक अनुशासन (Discipline) में रहकर अपनी प्रस्तुति देता है।

वर्तमान समय में बिहू हुसोरी (Bihu Husori) का प्रदर्शन अब केवल गाँवों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े शहरों में भी प्रतियोगिताएं (Competitions) आयोजित की जाती हैं। यह आयोजन असमिया संस्कृति की जड़ों को सिंचने का कार्य करता है। बिहू गीत (Bihu Geet) रेडियो, टेलीविजन और इंटरनेट के माध्यम से अब विश्व भर में सुने जा रहे हैं। ये गीत और हुसोरी की परंपरा असम के लोगों के लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उनकी आत्मा का संगीत (Music of Soul) है।

1 Answer

0 like 0 dislike
by (143k points)
बिहू गीत (Bihu Geet) असमिया लोक संगीत की वह मधुर विधा है जो प्रेम, प्रकृति और दैनिक जीवन के संघर्षों को सुरों में पिरोती है। ये गीत सरल भाषा में लिखे जाते हैं लेकिन इनका प्रभाव बहुत गहरा होता है। रोंगाली बिहू के दौरान गाए जाने वाले गीतों में 'हुसोरी' (Husori) का स्थान अत्यंत पूजनीय है। बिहू हुसोरी (Bihu Husori) में गाँव के बुजुर्गों और युवाओं का एक समूह घर-घर जाकर आशीर्वाद देता है और सुख-शांति की कामना करता है।

हुसोरी (Husori) गायन की शुरुआत आमतौर पर गाँव के 'नामघर' (Namghar) या किसी मंदिर से होती है। समूह के सदस्य आंगन में गोल घेरा बनाकर खड़े होते हैं और ढोल व ताल की संगत में गीत गाते हैं। इन गीतों में ईश्वर की स्तुति (Prayer) और मानवता के कल्याण का संदेश होता है। जब हुसोरी की टोली किसी के घर पहुँचती है, तो गृहस्वामी उन्हें 'गमोसा' (Gamosa) और दक्षिणा देकर सम्मानित करता है। यह परंपरा सामाजिक पदानुक्रम को मिटाकर सबको एक सूत्र (Thread of Oneness) में बाँधती है।

सामाजिक रूप से बिहू गीत (Bihu Geet) समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद का एक माध्यम हैं। गीतों के बोलों में असम के इतिहास, भूगोल और वहां की वनस्पतियों का सुंदर वर्णन मिलता है। ये गीत मौखिक साहित्य (Oral Literature) का हिस्सा हैं, जो बिना किसी लिखित लिपि के सदियों से जीवित हैं। बिहू हुसोरी (Bihu Husori) के दौरान गाए जाने वाले आशीर्वाद (Blessings) को लोग बहुत शुभ मानते हैं और विश्वास करते हैं कि इससे फसल अच्छी होगी और परिवार में समृद्धि आएगी।

संगीत की दृष्टि से बिहू गीत (Bihu Geet) अपनी विशिष्ट लय और सुर के लिए जाने जाते हैं। 'पेपा' (Pepa) की आवाज़ इन गीतों में एक अनोखी मिठास और जोश भर देती है। हुसोरी के दौरान किए जाने वाले नृत्य में गंभीरता (Sobriety) होती है, जो उसे सामान्य बिहू नृत्य से थोड़ा अलग बनाती है। यह परंपरा बुजुर्गों के अनुभवों और युवाओं के उत्साह का एक सुंदर मेल है। हुसोरी दल का हर सदस्य एक अनुशासन (Discipline) में रहकर अपनी प्रस्तुति देता है।

वर्तमान समय में बिहू हुसोरी (Bihu Husori) का प्रदर्शन अब केवल गाँवों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े शहरों में भी प्रतियोगिताएं (Competitions) आयोजित की जाती हैं। यह आयोजन असमिया संस्कृति की जड़ों को सिंचने का कार्य करता है। बिहू गीत (Bihu Geet) रेडियो, टेलीविजन और इंटरनेट के माध्यम से अब विश्व भर में सुने जा रहे हैं। ये गीत और हुसोरी की परंपरा असम के लोगों के लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उनकी आत्मा का संगीत (Music of Soul) है।
Welcome to DailyLifeQnA, get your simple everyday question–answer hub experts community. Find quick, reliable, and easy explanations to common life problems, tips, and doubts—all in one place.

Related questions

...