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लारू मिठाई (Laru Sweets) असमिया घरों में बिहू के दौरान बनाई जाने वाली सबसे छोटी मगर स्वादिष्ट मिठाई है। इसे मुख्य रूप से नारियल (Coconut) या तिल (Sesame) से तैयार किया जाता है। नारियल के लारू बनाने के लिए ताजे नारियल को घिसकर उसे चीनी या गुड़ के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है। जब मिश्रण गाढ़ा होकर चिपकने लगे, तब हाथों से छोटी-छोटी गोलियाँ (Small Balls) बनाई जाती हैं।

तिल के लारू (Til Laru) स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत गुणकारी होते हैं। तिल को पहले अच्छी तरह भून लिया जाता है और फिर उसे पिघले हुए गर्म गुड़ (Hot Jaggery) में मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया में गति बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि गुड़ ठंडा होने पर जम जाता है। लारू मिठाई (Laru Sweets) का आकार छोटा रखा जाता है ताकि इसे आसानी से परोसा और खाया जा सके। यह मिठाई ऊर्जा (Energy) का एक बहुत अच्छा स्रोत है।

एक अन्य प्रकार 'मुरीर लारू' (Murir Laru) है, जिसे फूले हुए चावल या मुमरी से बनाया जाता है। यह बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय है क्योंकि यह खाने में हल्का और कुरकुरा होता है। इन मिठाइयों में इलायची पाउडर (Cardamom Powder) डालने से इसकी महक और भी बढ़ जाती है। लारू मिठाई (Laru Sweets) को शुभ कार्यों और पूजा के प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है।

बिहू के दौरान जब मेहमान घर आते हैं, तो उन्हें चाय के साथ लारू और पीठा देना एक अनिवार्य शिष्टाचार (Mandatory Etiquette) है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी माँ से बेटी को विरासत में मिलती है। लारू बनाने की प्रक्रिया में घर की महिलाएं एक साथ बैठती हैं, जिससे हंसी-मजाक और सामाजिक मेलजोल (Social Interaction) बढ़ता है। यह मीठा पकवान असमिया त्यौहारों की सादगी को दर्शाता है।

आधुनिक समय में लारू मिठाई (Laru Sweets) अब बाज़ारों में भी पैकेट बंद मिलने लगी है। लेकिन घर पर बने लारू की बात ही कुछ और होती है क्योंकि उसमें शुद्ध सामग्री और ममता का भाव जुड़ा होता है। लोग अब इसे उपहार (Gifts) के रूप में एक-दूसरे को भेजते हैं। बिहू की खुशी इन छोटी-छोटी मीठी गोलियों के बिना अधूरी मानी जाती है। यह असम की मिठास को पूरी दुनिया में पहुँचाने का एक जरिया है।

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लारू मिठाई (Laru Sweets) असमिया घरों में बिहू के दौरान बनाई जाने वाली सबसे छोटी मगर स्वादिष्ट मिठाई है। इसे मुख्य रूप से नारियल (Coconut) या तिल (Sesame) से तैयार किया जाता है। नारियल के लारू बनाने के लिए ताजे नारियल को घिसकर उसे चीनी या गुड़ के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है। जब मिश्रण गाढ़ा होकर चिपकने लगे, तब हाथों से छोटी-छोटी गोलियाँ (Small Balls) बनाई जाती हैं।

तिल के लारू (Til Laru) स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत गुणकारी होते हैं। तिल को पहले अच्छी तरह भून लिया जाता है और फिर उसे पिघले हुए गर्म गुड़ (Hot Jaggery) में मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया में गति बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि गुड़ ठंडा होने पर जम जाता है। लारू मिठाई (Laru Sweets) का आकार छोटा रखा जाता है ताकि इसे आसानी से परोसा और खाया जा सके। यह मिठाई ऊर्जा (Energy) का एक बहुत अच्छा स्रोत है।

एक अन्य प्रकार 'मुरीर लारू' (Murir Laru) है, जिसे फूले हुए चावल या मुमरी से बनाया जाता है। यह बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय है क्योंकि यह खाने में हल्का और कुरकुरा होता है। इन मिठाइयों में इलायची पाउडर (Cardamom Powder) डालने से इसकी महक और भी बढ़ जाती है। लारू मिठाई (Laru Sweets) को शुभ कार्यों और पूजा के प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है।

बिहू के दौरान जब मेहमान घर आते हैं, तो उन्हें चाय के साथ लारू और पीठा देना एक अनिवार्य शिष्टाचार (Mandatory Etiquette) है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी माँ से बेटी को विरासत में मिलती है। लारू बनाने की प्रक्रिया में घर की महिलाएं एक साथ बैठती हैं, जिससे हंसी-मजाक और सामाजिक मेलजोल (Social Interaction) बढ़ता है। यह मीठा पकवान असमिया त्यौहारों की सादगी को दर्शाता है।

आधुनिक समय में लारू मिठाई (Laru Sweets) अब बाज़ारों में भी पैकेट बंद मिलने लगी है। लेकिन घर पर बने लारू की बात ही कुछ और होती है क्योंकि उसमें शुद्ध सामग्री और ममता का भाव जुड़ा होता है। लोग अब इसे उपहार (Gifts) के रूप में एक-दूसरे को भेजते हैं। बिहू की खुशी इन छोटी-छोटी मीठी गोलियों के बिना अधूरी मानी जाती है। यह असम की मिठास को पूरी दुनिया में पहुँचाने का एक जरिया है।
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