राज्य के राजस्व विभाग (Revenue Department) में लेखपाल या पटवारी (Patwari) के पद पर नियुक्ति हेतु अब अधिकांश राज्यों में कंप्यूटर साक्षरता (Computer Literacy) को अनिवार्य कर दिया गया है। चूंकि भू-अभिलेखों (Land Records) का पूर्णतः डिजिटलीकरण (Digitization) हो चुका है, इसलिए अभ्यर्थी के पास ट्रिपल सी (CCC) या उसके समकक्ष मान्यता प्राप्त डिप्लोमा (Diploma) होना आवश्यक है। यह प्रमाण पत्र तकनीकी दक्षता (Technical Proficiency) का प्रमाण माना जाता है।
शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification) के रूप में स्नातक (Graduation) की डिग्री के साथ स्थानीय भाषा का ज्ञान होना एक प्राथमिक शर्त है। लिखित परीक्षा में सामान्य हिंदी, गणित और ग्रामीण विकास (Rural Development) से संबंधित विषयों पर विशेष जोर दिया जाता है। राजस्व संबंधी शब्दावली (Revenue Terminology) और भूमि मापन (Land Measurement) की विधियों की समझ परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने में सहायक होती है।
पटवारी का मुख्य कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों (Land Disputes) का निपटारा करना और फसल नुकसान का आकलन (Assessment) करना होता है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं (Government Schemes) के क्रियान्वयन में जिला प्रशासन (District Administration) का सहयोग करना पड़ता है। ई-डिस्ट्रिक्ट (e-District) पोर्टल और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से जनता को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जारी करना उनके दैनिक कार्यों का हिस्सा है।
वेतनमान (Pay Scale) और भत्तों (Allowances) की दृष्टि से यह पद ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत प्रभावशाली माना जाता है। सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के अनुसार आकर्षक वेतन के साथ चिकित्सा और यात्रा सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। पदोन्नति (Promotion) के माध्यम से एक लेखपाल कानूनगो (Kanungo) और फिर नायब तहसीलदार (Naib Tehsildar) के पद तक पहुँच सकता है।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता हेतु अब साक्षात्कार (Interview) को समाप्त कर केवल लिखित परीक्षा के आधार पर मेरिट (Merit) तैयार की जाती है। सफल अभ्यर्थियों को तहसील स्तर (Tehsil Level) पर तैनात किया जाता है जहाँ वे सीधे तौर पर कृषकों और आम जनता से जुड़े होते हैं। यह पद ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) की रीढ़ माना जाता है और इसमें करियर विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।