गौतम बुद्ध (Gautam Buddha) का जन्म नेपाल के तराई क्षेत्र में स्थित लुम्बिनी (Lumbini) नामक स्थान पर हुआ था। सम्राट अशोक (Emperor Ashoka) ने इस स्थान की पवित्रता को प्रमाणित करने के लिए यहाँ एक शिलालेख और स्तंभ (Ashoka Pillar) स्थापित किया था। आज यह स्थान यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) है जहाँ दुनिया भर से तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं। लुम्बिनी का शांत वातावरण और माया देवी मंदिर (Maya Devi Temple) बुद्ध के जन्म की दिव्य गाथा सुनाते हैं।
वेसाक (Vesak) उत्सव के दौरान दुनिया भर के बौद्ध मठों में विशेष दीप प्रज्ज्वलन (Lamp Lighting) की परंपरा है। भक्त बुद्ध की प्रतिमा को फूलों से सजाते हैं और सुगंधित जल से अभिषेक करते हैं। यह क्रिया प्रतीकात्मक रूप से स्वयं के मन की शुद्धि (Purification of Mind) को दर्शाती है। इस दिन पशु-पक्षियों को पिंजरों से मुक्त करना और गरीबों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यकारी कार्य माना जाता है। दया और करुणा (Compassion) बुद्ध के जीवन का सार रही है।
लुम्बिनी (Lumbini) में आयोजित होने वाले समारोहों में विभिन्न देशों की बौद्ध संस्कृतियों (Buddhist Cultures) का संगम देखने को मिलता है। लोग 'धम्मपद' (Dhammapada) के श्लोकों का उच्चारण करते हैं और सामूहिक ध्यान (Group Meditation) में भाग लेते हैं। इस दिन दान (Dana) देने की परंपरा बहुत गहरी है, जहाँ लोग अपनी सामर्थ्य अनुसार वस्त्र और भोजन अर्पित करते हैं। यह सेवा भाव (Spirit of Service) समाज में सद्भाव और भाईचारा विकसित करने में सहायक होता है।
परंपरागत रूप से वेसाक (Vesak) पर 'बुद्ध पूर्णिमा' के दिन लोग मांस और मदिरा का त्याग करते हैं। वे पूर्णतः शाकाहारी भोजन (Vegetarian Food) अपनाते हैं ताकि जीव हत्या से बचा जा सके। घरों के बाहर रंगीन कागज की लालटेनें (Lanterns) लटकाना और शांति के प्रतीक सफेद झंडे फहराना एक सुंदर दृश्य उत्पन्न करता है। बुद्ध जयंती (Buddha Jayanti) का यह उत्सव मन को शांत करने और क्रोध का त्याग करने की प्रेरणा देता है।
इतिहासकारों के अनुसार बुद्ध (The Buddha) ने लुम्बिनी में जन्म लेकर संसार को एक नया दर्शन प्रदान किया। उनके जन्म के समय हुई अलौकिक घटनाओं का वर्णन प्राचीन ग्रंथों (Ancient Texts) में विस्तार से मिलता है। आज भी लुम्बिनी की पवित्र मिट्टी और वहाँ के सरोवर (Holy Pond) भक्तों के लिए अटूट श्रद्धा के केंद्र हैं। यह स्थान हमें सिद्धार्थ के एक राजकुमार से महामानव (Great Being) बनने की यात्रा की याद दिलाता है।