गौतम बुद्ध (Gautam Buddha) ने संसार के दुखों का कारण तृष्णा (Craving) को बताया और उससे मुक्ति के लिए अष्टांगिक मार्ग (Eightfold Path) का सुझाव दिया। इन आठ सिद्धांतों में सम्यक दृष्टि (Right View) और सम्यक संकल्प (Right Resolve) प्रमुख हैं। इनका अर्थ है सत्य को समझना और बुराई का त्याग कर सन्मार्ग पर चलने का दृढ़ निश्चय करना। यह जीवन जीने की एक वैज्ञानिक और नैतिक पद्धति (Scientific and Ethical Method) है जो मानसिक तनाव को कम करती है।
वाणी की शुद्धता के लिए सम्यक वाक (Right Speech) का पालन आवश्यक है, जिसका अर्थ है हमेशा सत्य और प्रिय बोलना। दैनिक जीवन में यदि हम कठोर शब्दों और झूठ का त्याग करें, तो आपसी संबंधों (Interpersonal Relationships) में मधुरता आती है। सम्यक कर्मांत (Right Action) हमें चोरी, हिंसा और अनैतिक कार्यों से दूर रहने की शिक्षा देता है। ये सिद्धांत एक स्वस्थ और न्यायप्रिय समाज (Just Society) के निर्माण के लिए आज भी प्रासंगिक हैं।
सम्यक आजीविका (Right Livelihood) का सिद्धांत सिखाता है कि हमें अपने जीवन निर्वाह के लिए ऐसा व्यापार या पेशा चुनना चाहिए जिससे किसी जीव को कष्ट न हो। ईमानदारी से कमाया गया धन ही सुख और मानसिक शांति (Peace of Mind) प्रदान करता है। सम्यक व्यायाम (Right Effort) का अर्थ है अपने मन में उत्पन्न होने वाले बुरे विचारों को रोकना और अच्छे विचारों को बढ़ावा देना। यह आत्म-अनुशासन (Self-discipline) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
ध्यान और एकाग्रता के लिए सम्यक स्मृति (Right Mindfulness) और सम्यक समाधि (Right Concentration) का महत्व बताया गया है। सजगता (Awareness) के साथ वर्तमान क्षण में जीना ही बुद्ध धर्म का सार है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माइंडफुलनेस (Mindfulness) का अभ्यास मानसिक रोगों को दूर करने और कार्यक्षमता बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है। बुद्ध का यह मार्ग किसी धर्म विशेष के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए कल्याणकारी है।
अष्टांगिक मार्ग (Eightfold Path) का अनुसरण करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व (Personality) में सकारात्मक परिवर्तन आता है। यह मार्ग मध्यम मार्ग (Middle Path) कहलाता है क्योंकि यह न तो अत्यधिक भोग-विलास का समर्थन करता है और न ही शरीर को कष्ट देने वाली कठिन तपस्या का। बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) के अवसर पर इन सिद्धांतों का मनन करना हमें जीवन के वास्तविक लक्ष्य की ओर ले जाता है। प्रज्ञा, शील और समाधि (Wisdom, Morality, and Concentration) ही निर्वाण के द्वार खोलते हैं।