ईद-उल-अजहा (Eid-ul-Adha) जिसे भारत में बकरीद के नाम से जाना जाता है, इस्लाम धर्म (Islam) का एक प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व मुख्य रूप से हजरत इब्राहिम (Prophet Ibrahim) की अटूट आस्था और उनके द्वारा दिए गए महान बलिदान (Sacrifice) की याद में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं (Religious Beliefs) के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे अपनी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी मांगी थी। उन्होंने बिना किसी संकोच के अपने पुत्र हजरत इस्माइल (Prophet Ismail) को अल्लाह की राह में समर्पित करने का निर्णय लिया।
हजरत इब्राहिम (Prophet Ibrahim) के इस अटूट विश्वास और समर्पण (Devotion) को देखकर अल्लाह अत्यंत प्रसन्न हुए। ऐन वक्त पर जब वे अपने पुत्र की कुर्बानी देने वाले थे, तब फरिश्ते (Angel) के माध्यम से वहाँ एक दुंबा (Ram) प्रकट हुआ और उनके पुत्र के स्थान पर उसकी कुर्बानी संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक घटना (Historical Event) ने यह संदेश दिया कि ईश्वर को रक्त या मांस नहीं, बल्कि मनुष्य का समर्पण और नियत (Intention) प्यारी है। तभी से प्रतिवर्ष इस दिन जानवरों की कुर्बानी (Animal Sacrifice) देने की परंपरा शुरू हुई।
बकरीद (Bakrid) का त्यौहार इस्लामी कैलेंडर (Islamic Calendar) के आखिरी महीने 'जुल-हिज्जा' की 10 तारीख को मनाया जाता है। यह पर्व त्याग, करुणा (Compassion) और भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लोग सामूहिक रूप से मस्जिदों (Mosques) में नमाज अदा करते हैं। यह त्यौहार सिखाता है कि सत्य और धर्म की राह पर चलने के लिए मनुष्य को अपने स्वार्थ और अहंकार (Ego) का त्याग कर देना चाहिए। यह आत्म-अनुशासन (Self-discipline) की एक महत्वपूर्ण परीक्षा है।
कुर्बानी (Sacrifice) की यह परंपरा केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह परोपकार (Philanthropy) से भी जुड़ी हुई है। त्यौहार के दौरान कुर्बानी के गोश्त (Meat) को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें से एक हिस्सा परिवार (Family) के लिए, एक रिश्तेदारों के लिए और एक हिस्सा विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों (Needy) के लिए रखा जाता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि समाज का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे और सभी खुशियों में समान रूप से शामिल हो सकें।
भारत में इस त्यौहार को गंगा-जमुनी तहजीब (Ganga-Jamuni Culture) के साथ मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देते हैं और विशेष पकवानों (Delicacies) का आनंद लेते हैं। यह दिन समाज में एकता और सद्भाव (Harmony) को सुदृढ़ करने का कार्य करता है। बकरीद हमें याद दिलाती है कि मानवता (Humanity) की सेवा ही ईश्वर की सबसे बड़ी इबादत है। कुर्बानी का यह जज्बा व्यक्ति को समाज के प्रति जिम्मेदार और दयालु बनाता है।