बकरीद (Bakrid) का त्यौहार स्वादिष्ट व्यंजनों और बेहतरीन मेहमान नवाजी (Hospitality) के लिए भी मशहूर है। चूँकि इस दिन कुर्बानी का गोश्त (Meat) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है, इसलिए मुख्य रूप से मटन से बने पकवान तैयार किए जाते हैं। 'मटन बिरयानी' (Mutton Biryani) इस त्यौहार की शान मानी जाती है, जिसे केसर, मसालों और सुगंधित चावल के साथ पकाया जाता है। इसके अलावा 'मटन कोरमा', 'शामी कबाब' और 'निहारी' जैसे व्यंजन भी बड़े चाव से बनाए जाते हैं।
मिठास के बिना कोई भी त्यौहार अधूरा है, इसलिए बकरीद पर 'शी़र खुरमा' (Sheer Khurma) या 'किवामी सवैयां' विशेष रूप से बनाई जाती हैं। दूध, सूखे मेवे (Dry Fruits) और सेंवई से बनी यह डिश रिश्तों में मिठास घोलने का काम करती है। मेहमानों का स्वागत (Welcoming Guests) शरबत और मेवों से किया जाता है। भारतीय घरों में इस दिन खुशबूदार मसालों की महक और उत्सव का उल्लास (Festive Fervor) हर तरफ दिखाई देता है।
मेहमान नवाजी (Hospitality) इस्लाम का एक अहम हिस्सा है और बकरीद पर यह अपने चरम पर होती है। लोग अपने दोस्तों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों को 'दावत' (Feast) पर आमंत्रित करते हैं। इस त्यौहार की खूबसूरती यह है कि इसमें गैर-मुस्लिम मित्र भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जिससे आपसी प्रेम (Mutual Love) और सांस्कृतिक मेलजोल बढ़ता है। दस्तरख्वान पर एक साथ बैठकर भोजन करना एकता का अद्भुत नजारा पेश करता है।
कुर्बानी के ताजे गोश्त (Fresh Meat) से बनाए गए 'कलेजी फ्राई' को अक्सर नाश्ते के रूप में परोसा जाता है। खाना परोसते समय शिष्टाचार (Etiquette) का विशेष ध्यान रखा जाता है। बड़े-बुजुर्गों को पहले भोजन कराया जाता है और बच्चों को 'ईदी' (Gift/Money) या उपहार दिए जाते हैं। यह परंपरा बच्चों में त्यौहार के प्रति उत्साह और बड़ों के प्रति सम्मान (Respect) की भावना विकसित करती है।
बकरीद (Bakrid) के पकवान केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि खुशियां बांटने के लिए होते हैं। कई लोग कच्चा गोश्त बांटने के साथ-साथ पका हुआ भोजन (Cooked Food) भी गरीबों के बीच वितरित करते हैं। यह उदारता (Generosity) त्यौहार की रूह है। स्वादिष्ट भोजन और स्नेहपूर्ण व्यवहार के माध्यम से लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं और पुरानी रंजिशें भुला देते हैं। यही उत्सव का असली उल्लास और भारतीय संस्कृति (Indian Culture) की पहचान है।