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बकरीद (Bakrid) का दिन दुआओं की कबूलियत (Acceptance of Prayers) का बहुत बड़ा जरिया माना जाता है। ईद की नमाज (Namaz) के बाद जब इमाम साहब दुआ मांगते हैं, तो उस वक्त पूरे दिल से शामिल होना चाहिए। दुआ मांगते समय हाथ फैलाना और आंखों में शर्मिंदगी के आंसू होना अल्लाह को बहुत पसंद है। यह वह समय है जब आप अपनी तमाम परेशानियों (Problems) और जरूरतों को अपने रब के सामने रख सकते हैं। दुआ (Bakrid Dua) में हमेशा अपनी और पूरी दुनिया की सलामती की बात कहनी चाहिए।

अपनी निजी दुआओं (Private Supplications) के अलावा, समाज के बीमारों और लाचारों के लिए प्रार्थना (Prayer) करना बहुत पुण्य का काम है। अल्लाह उन लोगों की पुकार जल्दी सुनता है जो दूसरों के लिए खैर (Wellness) मांगते हैं। दुआ (Dua) मांगते समय पूरा ध्यान और यकीन (Faith) होना चाहिए कि खुदा हमारी हर जायज तमन्ना को पूरा करेगा। नफरत और ईर्ष्या (Jealousy) को दिल से निकालकर मांगी गई प्रार्थना ही फलदायी (Fruitful) होती है।

बकरीद की दुआ (Bakrid Dua) में अपने उन पूर्वजों (Ancestors) को भी याद करना चाहिए जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके लिए मगफिरत (Forgiveness) की दुआ करना एक औलाद का फर्ज है। इसके साथ ही, देश में अमन-चैन (Peace and Harmony) और भाईचारे के लिए खास तौर पर गिड़गिड़ाना चाहिए। सामूहिक दुआ (Congregational Dua) में एक अजीब सी ताकत होती है जो दिलों को आपस में जोड़ देती है और रंजिशों को मिटा देती है।

इबादत (Worship) के इस पावन मौके पर अपनी कमियों और गुनाहों की माफी (Apology for Sins) मांगना सबसे जरूरी है। यह त्यौहार आत्म-मंथन (Self-introspection) का दिन है। जब हम अपनी गलतियों को स्वीकार (Accepting Mistakes) करते हैं और भविष्य में नेक बनने का वादा करते हैं, तो अल्लाह का रहम (Mercy of Allah) हम पर बरसता है। दुआ का अंत हमेशा पैगंबर मोहम्मद पर दुरूद (Salutations) भेजकर करना चाहिए, क्योंकि इससे दुआ के कबूल होने की संभावना बढ़ जाती है।

घर पर कुर्बानी (Qurbani) करते समय भी खास दुआएं पढ़ी जाती हैं, जो इस अमल को अल्लाह की बारगाह में पेश करने का तरीका हैं। दुआ (Dua) मांगते वक्त यह अहसास होना चाहिए कि सब कुछ उसी का दिया हुआ है। यह विनम्रता (Humility) ही एक सच्चे मुसलमान की निशानी है। बकरीद की दुआ (Bakrid Dua) हमें मानसिक मजबूती प्रदान करती है और आने वाले साल के लिए एक नई उम्मीद (New Hope) और ऊर्जा से भर देती है।

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बकरीद (Bakrid) का दिन दुआओं की कबूलियत (Acceptance of Prayers) का बहुत बड़ा जरिया माना जाता है। ईद की नमाज (Namaz) के बाद जब इमाम साहब दुआ मांगते हैं, तो उस वक्त पूरे दिल से शामिल होना चाहिए। दुआ मांगते समय हाथ फैलाना और आंखों में शर्मिंदगी के आंसू होना अल्लाह को बहुत पसंद है। यह वह समय है जब आप अपनी तमाम परेशानियों (Problems) और जरूरतों को अपने रब के सामने रख सकते हैं। दुआ (Bakrid Dua) में हमेशा अपनी और पूरी दुनिया की सलामती की बात कहनी चाहिए।

अपनी निजी दुआओं (Private Supplications) के अलावा, समाज के बीमारों और लाचारों के लिए प्रार्थना (Prayer) करना बहुत पुण्य का काम है। अल्लाह उन लोगों की पुकार जल्दी सुनता है जो दूसरों के लिए खैर (Wellness) मांगते हैं। दुआ (Dua) मांगते समय पूरा ध्यान और यकीन (Faith) होना चाहिए कि खुदा हमारी हर जायज तमन्ना को पूरा करेगा। नफरत और ईर्ष्या (Jealousy) को दिल से निकालकर मांगी गई प्रार्थना ही फलदायी (Fruitful) होती है।

बकरीद की दुआ (Bakrid Dua) में अपने उन पूर्वजों (Ancestors) को भी याद करना चाहिए जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके लिए मगफिरत (Forgiveness) की दुआ करना एक औलाद का फर्ज है। इसके साथ ही, देश में अमन-चैन (Peace and Harmony) और भाईचारे के लिए खास तौर पर गिड़गिड़ाना चाहिए। सामूहिक दुआ (Congregational Dua) में एक अजीब सी ताकत होती है जो दिलों को आपस में जोड़ देती है और रंजिशों को मिटा देती है।

इबादत (Worship) के इस पावन मौके पर अपनी कमियों और गुनाहों की माफी (Apology for Sins) मांगना सबसे जरूरी है। यह त्यौहार आत्म-मंथन (Self-introspection) का दिन है। जब हम अपनी गलतियों को स्वीकार (Accepting Mistakes) करते हैं और भविष्य में नेक बनने का वादा करते हैं, तो अल्लाह का रहम (Mercy of Allah) हम पर बरसता है। दुआ का अंत हमेशा पैगंबर मोहम्मद पर दुरूद (Salutations) भेजकर करना चाहिए, क्योंकि इससे दुआ के कबूल होने की संभावना बढ़ जाती है।

घर पर कुर्बानी (Qurbani) करते समय भी खास दुआएं पढ़ी जाती हैं, जो इस अमल को अल्लाह की बारगाह में पेश करने का तरीका हैं। दुआ (Dua) मांगते वक्त यह अहसास होना चाहिए कि सब कुछ उसी का दिया हुआ है। यह विनम्रता (Humility) ही एक सच्चे मुसलमान की निशानी है। बकरीद की दुआ (Bakrid Dua) हमें मानसिक मजबूती प्रदान करती है और आने वाले साल के लिए एक नई उम्मीद (New Hope) और ऊर्जा से भर देती है।
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