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हिजरी नया साल (Hijri New Year) मुस्लिम समाज को अपने गौरवशाली इतिहास (Glorious History) और संघर्षों की याद दिलाता है। मुहर्रम के महीने में आयोजित होने वाली मजलिसें (Assemblies) ज्ञान और नैतिकता (Ethics) का प्रसार करने का सबसे बड़ा केंद्र होती हैं। इन सभाओं में विद्वान इमाम हुसैन के जीवन और उनकी शिक्षाओं (Teachings) पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं। इसका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह लोगों को सत्य, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा (Selfless Service) के लिए प्रेरित करता है।

मजलिसों (Religious Assemblies) का मुख्य उद्देश्य 'अम्र बिल मारूफ' (अच्छाई का आदेश देना) और 'नही अनिल मुनकर' (बुराई से रोकना) है। यहाँ होने वाले प्रवचन (Discourses) युवाओं को बुराइयों जैसे नशा, झूठ और हिंसा से दूर रहने की प्रेरणा देते हैं। करबला की कहानी सुनकर लोगों की आँखों में जो आँसू आते हैं, वे उनके हृदय को कोमल और संवेदनशील (Sensitive) बनाते हैं। यह भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Connection) समाज में अपराधों को कम करने और नैतिकता बढ़ाने में सहायक होता है।

मुहर्रम (Muharram) के दौरान होने वाली ये गतिविधियाँ सामाजिक समरसता (Social Harmony) को भी बढ़ावा देती हैं। इमामबाड़ों में हर वर्ग और पृष्ठभूमि के लोग एक साथ बैठते हैं, जिससे भेदभाव (Discrimination) की दीवारें टूटती हैं। लोग एक-दूसरे के दुख-सुख में शामिल होते हैं और 'सबिल' व 'लंगर' (Community Kitchen) के माध्यम से सेवा का कार्य करते हैं। यह निस्वार्थ सेवा भाव एक आदर्श समाज (Ideal Society) के निर्माण की नींव रखता है।

मजलिस (Assemblies) में पढ़ी जाने वाली कविताएं और मरसिए (Elegies) भाषा और साहित्य (Literature) को भी समृद्ध करते हैं। ये रचनाएँ समाज को इतिहास से जोड़ती हैं और देशभक्ति व बलिदान की भावना जागृत करती हैं। हिजरी नया साल (Hijri New Year) हमें आत्म-सुधार (Self-improvement) का संकल्प लेने का अवसर देता है। लोग अपनी बुरी आदतों को छोड़कर एक नई और नेक जिंदगी शुरू करने का वादा करते हैं।

समाज में व्याप्त तनाव और अशांति के बीच मुहर्रम का यह अनुशासन (Discipline) और धैर्य एक मिसाल पेश करता है। यह हमें सिखाता है कि बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना भी विश्वास (Faith) और एकता के साथ किया जा सकता है। हिजरी नए साल का आगाज़ हमें यह संदेश देता है कि हमें आने वाले समय में मानवता की भलाई (Welfare of Humanity) के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए। इमाम हुसैन की यादें हमें हमेशा एक जागरूक और न्यायप्रिय नागरिक (Just Citizen) बने रहने की प्रेरणा देती हैं।

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हिजरी नया साल (Hijri New Year) मुस्लिम समाज को अपने गौरवशाली इतिहास (Glorious History) और संघर्षों की याद दिलाता है। मुहर्रम के महीने में आयोजित होने वाली मजलिसें (Assemblies) ज्ञान और नैतिकता (Ethics) का प्रसार करने का सबसे बड़ा केंद्र होती हैं। इन सभाओं में विद्वान इमाम हुसैन के जीवन और उनकी शिक्षाओं (Teachings) पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं। इसका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह लोगों को सत्य, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा (Selfless Service) के लिए प्रेरित करता है।

मजलिसों (Religious Assemblies) का मुख्य उद्देश्य 'अम्र बिल मारूफ' (अच्छाई का आदेश देना) और 'नही अनिल मुनकर' (बुराई से रोकना) है। यहाँ होने वाले प्रवचन (Discourses) युवाओं को बुराइयों जैसे नशा, झूठ और हिंसा से दूर रहने की प्रेरणा देते हैं। करबला की कहानी सुनकर लोगों की आँखों में जो आँसू आते हैं, वे उनके हृदय को कोमल और संवेदनशील (Sensitive) बनाते हैं। यह भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Connection) समाज में अपराधों को कम करने और नैतिकता बढ़ाने में सहायक होता है।

मुहर्रम (Muharram) के दौरान होने वाली ये गतिविधियाँ सामाजिक समरसता (Social Harmony) को भी बढ़ावा देती हैं। इमामबाड़ों में हर वर्ग और पृष्ठभूमि के लोग एक साथ बैठते हैं, जिससे भेदभाव (Discrimination) की दीवारें टूटती हैं। लोग एक-दूसरे के दुख-सुख में शामिल होते हैं और 'सबिल' व 'लंगर' (Community Kitchen) के माध्यम से सेवा का कार्य करते हैं। यह निस्वार्थ सेवा भाव एक आदर्श समाज (Ideal Society) के निर्माण की नींव रखता है।

मजलिस (Assemblies) में पढ़ी जाने वाली कविताएं और मरसिए (Elegies) भाषा और साहित्य (Literature) को भी समृद्ध करते हैं। ये रचनाएँ समाज को इतिहास से जोड़ती हैं और देशभक्ति व बलिदान की भावना जागृत करती हैं। हिजरी नया साल (Hijri New Year) हमें आत्म-सुधार (Self-improvement) का संकल्प लेने का अवसर देता है। लोग अपनी बुरी आदतों को छोड़कर एक नई और नेक जिंदगी शुरू करने का वादा करते हैं।

समाज में व्याप्त तनाव और अशांति के बीच मुहर्रम का यह अनुशासन (Discipline) और धैर्य एक मिसाल पेश करता है। यह हमें सिखाता है कि बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना भी विश्वास (Faith) और एकता के साथ किया जा सकता है। हिजरी नए साल का आगाज़ हमें यह संदेश देता है कि हमें आने वाले समय में मानवता की भलाई (Welfare of Humanity) के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए। इमाम हुसैन की यादें हमें हमेशा एक जागरूक और न्यायप्रिय नागरिक (Just Citizen) बने रहने की प्रेरणा देती हैं।
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